फाउंडेशन स्कूल में छात्र अब सिमुलेटर पर सीख रहे विमान उड़ाने के गुर

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तीन दिवसीय एविएशन ट्रेनिंग में 500 विद्यार्थी जानेंगे कॉकपिट का रोमांच, लाइसेंस प्राप्त पायलट दे रहे करियर टिप्स                                                                      बक्सर खबर। शहर के गुरुदास मठिया स्थित फाउंडेशन स्कूल में बुधवार को तीन दिवसीय फ्लाइट सिमुलेटर प्रशिक्षण कार्यक्रम का भव्य शुभारंभ किया गया। यह आयोजन एविएशन अवेयरनेस प्रोग्राम के तहत फ्लाइंग सोलर कंपनी के सहयोग से किया जा रहा है। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को उड्डयन क्षेत्र के प्रति जागरूक करना, वैज्ञानिक सोच को प्रोत्साहित करना तथा प्रारंभिक अवस्था में ही उन्हें पायलट प्रशिक्षण का व्यावहारिक अनुभव प्रदान करना है। विद्यालय और कंपनी का संयुक्त लक्ष्य है कि इस विशेष पहल के माध्यम से लगभग 500 विद्यार्थियों को अनुभवी एवं लाइसेंस प्राप्त पायलटों की उपस्थिति में फ्लाइट सिमुलेटर पर विमान उड़ाने का अनुभव कराया जाए।

प्रशिक्षण के दौरान विद्यार्थियों को आधुनिक विमानन तकनीक, कॉकपिट में प्रयुक्त उपकरणों, नेविगेशन सिस्टम, रनवे की प्रक्रिया, टेक-ऑफ और लैंडिंग की तकनीक, मौसम के प्रभाव तथा सुरक्षा मानकों की विस्तृत जानकारी दी जा रही है। फ्लाइट सिमुलेटर के माध्यम से बच्चों ने यह प्रत्यक्ष अनुभव किया कि पायलट किस प्रकार हवा में संतुलन बनाए रखते हैं, दिशा नियंत्रित करते हैं और आपातकालीन परिस्थितियों में त्वरित निर्णय लेते हैं। इस अभ्यास ने विद्यार्थियों के आत्मविश्वास को बढ़ाने के साथ-साथ उनमें अनुशासन, एकाग्रता और निर्णय क्षमता का भी विकास किया। कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञ पायलटों ने बताया कि पायलट बनने के लिए मुख्यतः तीन प्रकार की ट्रेनिंग आवश्यक होती है, स्टूडेंट पायलट लाइसेंस, प्राइवेट पायलट लाइसेंस और कमर्शियल पायलट लाइसेंस।

फोटो -फ्लाइट सिमुलेटर प्रशिक्षण कार्यक्रम में शामिल फाउंडेशन स्कूल के छात्र

विद्यार्थियों को इन चरणों की संपूर्ण जानकारी दी गई, जिससे वे अपने करियर की दिशा स्पष्ट कर सकें। विद्यालय के प्राचार्य मनोज कुमार त्रिगुण ने कहा कि आज का युग तकनीक और नवाचार का है। यदि बच्चों को प्रारंभिक अवस्था में सही दिशा और अवसर मिल जाए, तो वे अपने सपनों को नई उड़ान दे सकते हैं। यह कार्यक्रम केवल विमान उड़ाने का अनुभव नहीं, बल्कि बड़े लक्ष्य निर्धारित करने की प्रेरणा है। उन्होंने बताया कि 12 से 18 वर्ष की आयु में इस प्रकार के व्यावहारिक अनुभव विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास, करियर मार्गदर्शन और वैज्ञानिक दृष्टिकोण के निर्माण में अत्यंत सहायक होते हैं। विद्यालय भविष्य में भी ऐसे नवाचारी कार्यक्रमों का आयोजन करता रहेगा। कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों में विशेष उत्साह देखने को मिला। कई बच्चों ने पायलट बनने और एविएशन क्षेत्र में करियर बनाने की इच्छा व्यक्त की। अभिभावकों ने भी विद्यालय की इस पहल की सराहना करते हुए इसे विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।

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