शिक्षा विभाग के निलंबित लिपिक ने पांच महीने से दबाए अभिलेख, निदेशक ने दिया एफआईआर का आदेश

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माध्यमिक शिक्षा निदेशक सज्जन आर ने डीईओ से एक हफ्ते में मांगी कार्रवाई रिपोर्ट                                    बक्सर खबर। जिला शिक्षा कार्यालय में निलंबित लिपिक द्वारा पांच माह बाद भी कार्यालयीय संचिकाओं का प्रभार नहीं सौंपे जाने का मामला अब तूल पकड़ चुका है। शिक्षा विभाग के निदेशक (माध्यमिक शिक्षा) सज्जन आर ने इस मामले में डीईओ बक्सर को कड़े शब्दों में निर्देश जारी करते हुए एक सप्ताह के भीतर कार्रवाई प्रतिवेदन देने का आदेश दिया है। मामले की शुरुआत तब हुई जब सांसद प्रतिनिधि अरविन्द कुमार सिंह ने लिखित अभ्यावेदन देकर बताया कि निलंबित लिपिक भालचन्द्र शर्मा ने निलंबन के बाद भी कार्यालय की संचिकाओं और अभिलेखों का प्रभार नहीं सौंपा है।

इससे शासकीय कार्य गंभीर रूप से प्रभावित हो रहे हैं। अभ्यावेदन में यह भी उल्लेख है कि लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी, बक्सर द्वारा कई बार नोटिस जारी किए जाने के बाद डीईओ ने पत्रांक-600 दिनांक 30.12.2025 के माध्यम से प्रतिवेदन दिया, परंतु वास्तविकता यह है कि पांच माह बीतने के बावजूद प्रभार हस्तांतरण नहीं हो सका। निदेशक (मा०शि०) ने अपने पत्र में साफ कहा है कि निलंबन के उपरांत अभिलेखों का प्रभार नहीं देना केवल लापरवाही नहीं, बल्कि कार्यालय कार्य को बाधित करने की मंशा को दर्शाता है। पत्र में यह भी तीखी टिप्पणी की गई है कि इतने लंबे समय तक प्रभार नहीं सौंपे जाने के बावजूद अनुशासनिक या कानूनी कार्रवाई नहीं होना प्रशासनिक अक्षमता को उजागर करता है।

फोटो – डीईओ कार्यालय, बक्सर

निदेशक ने निर्देश दिया है कि यदि अब तक प्रभार हस्तांतरित नहीं हुआ है तो संबंधित कर्मी के विरुद्ध अभिलेखों/सामग्रियों का स्थायी गबन मानते हुए स्थानीय थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई जाए। साथ ही, अनुमंडल पदाधिकारी के माध्यम से इन्वेंट्री तैयार कर दंडाधिकारी की प्रतिनियुक्ति कर विधिवत प्रभार हस्तांतरण सुनिश्चित कराया जाए। निदेशक ने सांसद प्रतिनिधि द्वारा भेजे गए अभ्यावेदन की छायाप्रति संलग्न करते हुए डीईओ बक्सर को स्पष्ट निर्देश दिया है कि एक सप्ताह के भीतर की गई कार्रवाई का प्रतिवेदन उपलब्ध कराएं। इस पूरे प्रकरण ने जिला शिक्षा कार्यालय की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं। पांच महीने तक फाइलों का प्रभार अटका रहना न केवल विभागीय ढिलाई को दर्शाता है, बल्कि इससे शिक्षा से जुड़े हजारों शिक्षकों, कर्मियों और योजनाओं पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका है।

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