प्रो. कृष्णकांत सिंह बने एमवी कॉलेज के प्राचार्य

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पूर्व छात्र तुषार विजेता ने की शिष्टाचार भेंट, छात्रों-शिक्षकों में खुशी की लहर                                                     बक्सर खबर। वर्षों से प्रभारी प्राचार्य के भरोसे चल रहे महर्षि विश्वामित्र महाविद्यालय को आखिरकार स्थाई प्राचार्य मिल गया है। बिहार राज्य विश्वविद्यालय सेवा आयोग द्वारा आयोजित नियमित प्राचार्य की परीक्षा में सफल होकर प्रो. डॉ. कृष्णकांत सिंह (केके सिंह) ने सोमवार को कॉलेज का कार्यभार संभाल लिया। उनकी नियुक्ति से कॉलेज के शिक्षकों, शिक्षाकेतर कर्मचारियों और छात्रों में जबरदस्त उत्साह देखा जा रहा है। लंबे समय से स्थायित्व की प्रतीक्षा कर रहा कॉलेज प्रशासन अब नई ऊर्जा और दिशा की ओर अग्रसर होता नजर आ रहा है। प्राचार्य के रूप में पदभार ग्रहण करने के अगले दिन मंगलवार को एमवी कॉलेज के पूर्व छात्र व छात्र नेता तुषार विजेता ने प्राचार्य कक्ष में डॉ. केके सिंह से शिष्टाचार मुलाकात की। तुषार ने अंगवस्त्र, माला और कलम भेंट कर अपने प्रिय शिक्षक को सम्मानित किया।

तुषार विजेता ने भावुक होकर कहा कि “यह मेरे लिए सौभाग्य की बात है कि जिस कॉलेज से मैंने पढ़ाई की, आज वहीं मेरे प्रिय गुरु जी प्राचार्य के रूप में योगदान दे चुके हैं। सर के नेतृत्व में कॉलेज को निश्चित रूप से नई दिशा मिलेगी। एक शिष्य के रूप में मुझे गर्व है कि ऐसे विद्वान और समर्पित गुरु का मार्गदर्शन मिला।” दोनों के बीच कॉलेज परिसर में लगभग चार घंटे तक बातचीत चली। तुषार ने बताया कि उन्होंने वर्ष 2015 में एमवी कॉलेज से 11वीं कक्षा में नामांकन लिया था और बीएससी तक की पढ़ाई यहीं से पूरी की। उन्होंने कॉलेज में छात्र राजनीति, सत्र नियमितीकरण और बुनियादी सुविधाओं की मांग को लेकर किए गए संघर्षों को साझा किया। इस दौरान डॉ. सिंह ने कॉलेज के विकास के लिए अपनी योजनाओं का भी जिक्र किया।

शिष्टाचार मुलाकात करते छात्र नेता तुषार विजेता

तुषार ने कहा कि “डॉ. केके सिंह न केवल एक योग्य प्राध्यापक हैं, बल्कि एक कुशल प्रशासक और सच्चे शिक्षाविद् भी हैं। जब मैं बीएड कर रहा था, उस समय भी सर अपने व्यस्त विभागीय कार्यों के बीच हमें पढ़ाने के लिए समय निकालते थे।” उनकी यह प्रतिबद्धता और विद्यार्थियों के प्रति समर्पण आज उन्हें एक प्रभावशाली प्राचार्य के रूप में प्रस्तुत करता है। प्रो. सिंह की नियुक्ति से एमवी कॉलेज में शिक्षा की गुणवत्ता, प्रशासनिक पारदर्शिता और शैक्षणिक वातावरण में निश्चित ही सकारात्मक परिवर्तन आने की उम्मीद जताई जा रही है।

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