बक्सर खबर (गुरू गरम है)। धर्म का कार्य करने वाले को धार्मिक कहा जाता है। लेकिन, फेसबुक पर ज्ञान देने वाले को पुण्यात्मा कहना गलत नहीं होगा। पिछले दिनों एक वाकया देखने को मिला। यज्ञ पूर्ण होने के कुछ घंटे बाद ही यज्ञशाला भी स्वाहा हो गई। कुछ लोग वहां परिक्रमा करने पहुंचे थे। उन्होंने जब आग की लपटों को देखा तो पानी डालने की जगह मोबाइल खोल वीडियो बनाने लगे। और कुछ ने तो सीधे लाइव पोस्ट डाली। क्योंकि वे बड़े धर्मात्मा जो थे। और उनसे भी बड़े धर्मात्मा वे निकले जो तीन सौ किलोमीटर दूर बैठकर फेसबुक पर पापी और पुण्यात्मा का संदेश देने लगे। उन सुनामधन्य महापुरुषों से लोगों से संपर्क करना शुरू किया। जो नौ दिनों तक चले यज्ञ में किस-किस की आहुति दी गई। यह भी नहीं जानते थे। लेकिन, आग क्या लगी उन लोगों के कलेजे में ठंडक पहुंच गई। क्योंकि पुण्यात्मा जो ठहरे।
यह सब देख सुनकर गुरू का माथा एक दम से झन्ना गया। तभी बता चला स्वयं को बड़ा महात्मा बताने वाले एक नैतिक मूल्यों के कमजोर बाबा भी वीडियो शेयर का सुर्खियां बटोरने लगे। पता नहीं इस यज्ञ की किसी अन्य तस्वीर को उन्होंने साझा किया था या नहीं। लेकिन, चलचित्र वाली आग में रोटी सेकने लगे। यह देखकर तो गुरु का मिजाज गरम हो गया। गलत को हवा देने वाले महात्मा क्यूं बनने चले आते हैं। अगर उन्हें आनंद निंदा से मिलता है तो प्रभु का भजन करने की क्या जरुरत। कुछ तो ऐसे भी नजर आए। जो स्वयं को पत्रकार कहते हैं।
सोशल प्लेटफार्म पर कुछ लोगों के घायल होने की बात कहते नजर आए। जब तथ्य का ज्ञान है ही नहीं तो व्याख्या करने की क्या जरुरत। पत्रकारिता का भी धर्म है। उसकी ही लाज रखते। नहीं पता था तो कुछ कम ही शब्द लिखते। एक तो ऐसा मिला। जिसने बस ही पलट दी। और कुछ ओशो के चेला पापी और पुण्य आत्मा को प्रमाणपत्र जारी करने लगे। कुल मिलाकर ऐसे लुच्चों की चिल्लम-चिल्ली से गुरु का माथा गरम हो गया है।( गुरु गरम है, बक्सर खबर का साप्ताहिक कॉलम है। जो शनिवार को प्रकाशित होता है। यह पूरी तरह सत्य विषय आधारित है। जो एक शब्दों का दर्पण है। गलत करने वालों को उनकी करनी सामने रखने का माध्यम। )































































































