जयघोष और बैंड-बाजे के साथ निकली कलश यात्रा, श्रीमद्भागवत कथा का मंगल शुभारंभ

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26 फरवरी को भंडारे के साथ होगी पूर्णाहुति, उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़                                                 बक्सर खबर। सदर प्रखंड के गोसाईंपुर गांव में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के प्रथम दिवस गुरुवार को भव्य जलभरी शोभायात्रा निकाली गई। बैंड-बाजे और जयघोष के बीच निकली इस शोभायात्रा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। महिलाओं ने सिर पर कलश रखकर यात्रा की शुरुआत की, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा। शोभायात्रा नया बाजार रेलवे गुमटी से होते हुए ऐतिहासिक किला मैदान पहुंची। वहां से श्रद्धालु पैदल वीर कुंवर सिंह चौक के रास्ते पौराणिक रामरेखा घाट पहुंचे। यात्रा के दौरान भक्त भजन-कीर्तन पर झूमते रहे और युवाओं ने भगवान के नाम का जयघोष कर माहौल को और अधिक श्रद्धामय बना दिया। रामरेखा घाट पर वैदिक मंत्रोच्चार और विधि-विधान के साथ श्रद्धालुओं ने पवित्र गंगाजल भरा। तत्पश्चात पुरुष एवं महिला श्रद्धालु गंगाजल लेकर पुनः गांव की ओर प्रस्थान कर गए।

श्रीमद्भागवत कथा के प्रथम दिन मामाजी महाराज के कृपापात्र आचार्य रणधीर ओझा ने कहा कि भागवत पुराण का मूल उद्देश्य जीव को ईश्वर से जोड़ना और उसके जीवन में दिव्यता का संचार करना है। उन्होंने कहा कि भागवत केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि भगवान का साक्षात् स्वरूप है और इसका श्रवण स्वयं भगवान से मिलने का माध्यम है। आचार्य श्री ने सत्संग का अर्थ स्पष्ट करते हुए कहा कि सत् अर्थात सत्य, परमात्मा या सद्गुणों के साथ संग करना ही सच्चा सत्संग है। यह केवल साधु-संतों के समीप बैठना नहीं, बल्कि मन, वचन और कर्म से भगवान की ओर उन्मुख होना है। सत्संग से मन की शुद्धि होती है। जैसे गंदे वस्त्र जल से धुलकर निर्मल हो जाते हैं, वैसे ही मन के विकार सत्संग के अमृत से दूर हो जाते हैं। सत्संग से व्यक्ति के संस्कारों में सकारात्मक परिवर्तन आता है और उसका झुकाव भक्ति, सेवा और अध्यात्म की ओर बढ़ता है।

फोटो – जलभरी शोभायात्रा में शामिल श्रद्धालु

आचार्य श्री ने कहा कि सत्संग व्यक्ति के आचार-विचार और जीवन दृष्टि को बदलने का सशक्त माध्यम है। भगवान के चरित्र और भक्तों के जीवन से प्रेरणा लेकर व्यक्ति अपने कर्मों को सुधार सकता है और मानसिक शांति, भक्ति तथा आध्यात्मिक उन्नति की दिशा में अग्रसर हो सकता है। आयोजक बबन उपाध्याय और उनके पुत्र अवधेश उपाध्याय ने बताया कि श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन 25 फरवरी तक प्रतिदिन अपराह्न 3:30 बजे से संध्या 7 बजे तक किया जाएगा। 26 फरवरी को कथा की पूर्णाहुति के साथ भव्य हवन एवं भंडारा का आयोजन किया गया है, जिसमें क्षेत्र के श्रद्धालुओं से अधिक से अधिक संख्या में शामिल होकर प्रसाद ग्रहण करने की अपील की गई है।

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