डीएम ने विकास योजनाओं की परखी जमीनी हकीकत, मॉडल पंचायत भवन बनाने का निर्देश

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निमेज में निर्माणाधीन पंचायत सरकार भवन का निरीक्षण, मत्स्य हैचरी और कृषि फार्म के जरिए स्वरोजगार बढ़ाने पर जोर                                                                        बक्सर खबर। जिलाधिकारी साहिला ने गुरुवार को ब्रह्मपुर प्रखंड के विभिन्न विकास योजनाओं का स्थल निरीक्षण कर कार्य प्रगति की समीक्षा की। निरीक्षण के दौरान उन्होंने निर्माणाधीन पंचायत सरकार भवन, प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना अंतर्गत संचालित मत्स्य हैचरी एवं कृषि विभाग के कृषि फार्म का जायजा लिया और संबंधित अधिकारियों को गुणवत्ता के साथ समयबद्ध कार्य पूर्ण करने के निर्देश दिए। सबसे पहले डीएम ने निमेज स्थित निर्माणाधीन पंचायत सरकार भवन का निरीक्षण किया। कार्य प्रगति पर संतोष व्यक्त करते हुए उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिया कि भवन का निर्माण निर्धारित समय सीमा के भीतर एवं उच्च गुणवत्ता के साथ पूर्ण कराया जाए। पंचायत सरकार भवन के समीप पर्याप्त सरकारी भूमि उपलब्ध होने पर उन्होंने अंचलाधिकारी ब्रह्मपुर को निर्देशित किया कि विवाह मंडप, उप स्वास्थ्य केन्द्र एवं अन्य जनोपयोगी योजनाओं के लिए अविलंब प्रस्ताव तैयार कर समर्पित करें, ताकि एक ही परिसर में ग्रामीणों को विभिन्न सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें।

जिला पंचायत राज पदाधिकारी को पंचायत सरकार भवन की नियमित मॉनिटरिंग करने तथा सभी आवश्यक सुविधाओं से सुसज्जित कर इसे मॉडल भवन के रूप में विकसित करने का निर्देश दिया गया। इसके बाद डीएम ने ब्रह्मपुर प्रखंड अंतर्गत किसागर में प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत संचालित मत्स्य हैचरी स्थल का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान यह तथ्य सामने आया कि जिले में इस प्रकार की यह एकमात्र मत्स्य हैचरी है। उन्होंने जिला मत्स्य पदाधिकारी को निर्देश दिया कि अधिक से अधिक मत्स्य पालकों को हैचरी की जानकारी दी जाए तथा प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित कर युवाओं को मत्स्य पालन के क्षेत्र में स्वरोजगार के लिए प्रोत्साहित किया जाए।

फोटो – किसागर स्थित मत्स्य हैचरी का निरीक्षण करती डीएम साहिला

डीएम ने कृषि विभाग द्वारा संचालित कृषि फार्म का भी भ्रमण किया। यहां विभिन्न प्रकार की रबी फसलों का आच्छादन किया गया है। उन्होंने जिला कृषि पदाधिकारी को निर्देशित किया कि परंपरागत फसलों के साथ-साथ नकदी फसलें, फल एवं अन्य आयवर्धक फसलों का भी आच्छादन कराया जाए। साथ ही आधुनिक कृषि तकनीक एवं संयंत्रों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया, ताकि किसान यहां से प्रेरित होकर अपनी आय में वृद्धि कर सकें। किसानों को बेहतर संस्थानों में प्रशिक्षण दिलाने का भी निर्देश दिया गया, जिससे वे नई तकनीकों को अपनाकर उत्पादन और आमदनी बढ़ा सकें।

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