शादी के मंडप से पुलिस बनकर दुल्हन को उठा ले जाते थे गिरोह के सदस्य बक्सर खबर। जिला पुलिस ने शातिर ठगों के एक ऐसे गिरोह का पर्दाफाश किया है जो फर्जी शादी रचाकर भोले-भाले लोगों से मोटी रकम और गहने ठग लिया करते थे। गुरुवार को पुलिस अधीक्षक कार्यालय में आयोजित प्रेसवार्ता के दौरान इस सनसनीखेज मामले का खुलासा किया गया। पुलिस ने गिरोह की सरगना लुटेरी दुल्हन और फर्जी पुलिसकर्मी की भूमिका निभाने वाले मुख्य आरोपी समेत कुल 9 लोगों को गिरफ्तार किया है। एसपी शुभम आर्य ने बताया कि कानपुर निवासी रमा देवी ने मुफस्सिल थाने में लिखित आवेदन देकर शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने बताया कि जिले के कोरान सराय की रहने वाली कलावती देवी और उसके पति रमेश गोंड ने उनके देवर विनय की शादी कराने का झांसा दिया। शादी तय करने के नाम पर 50 हजार रुपये और गहनों की मांग की गई, जिसमें से 40 हजार रुपये और जेवर दे दिए गए थे।
8 अप्रैल को बक्सर कोर्ट में कागजी प्रक्रिया के तहत विनय और नीतू कुमारी (नकली दुल्हन) की शादी कराई गई। इसके बाद रस्मों के लिए दोनों पक्ष मुफस्सिल थाना क्षेत्र के महादेवा घाट पहुंचे। अभी रस्में पूरी ही हुई थीं कि मोटरसाइकिल पर सवार दो व्यक्ति वहां पहुंचे, जिन्होंने खुद को पुलिस बताया। वे दुल्हन को यह कहकर जबरन अपने साथ ले गए कि तुम सबको थाने चलना होगा। इस अचानक हुई कार्रवाई से डरे-सहमे दूल्हा पक्ष के लोग वहां से भाग खड़े हुए। मामले की गंभीरता को देखते हुए एसपी ने सदर एसडीपीओ गौरव पाण्डेय के नेतृत्व में एक विशेष टीम का गठन किया। टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए सबसे पहले फर्जी पुलिस की भूमिका निभाने वाले हैदर खां को दबोचा। उसकी निशानदेही पर छापेमारी कर गिरोह के अन्य 8 सदस्यों को गिरफ्तार किया गया।
गिरफ्तार अभियुक्तों की पहचान नीतू देवी (दुल्हन) बलिया, मीना देवी (नकली मां) राजपुर, शिवबच्चन चौहान (नकली पिता) राजपुर, जयशंकर चौहान (नकली भाई) राजपुर, सुनैना देवी (बहन) इटाढ़ी, हाकिम चौहान – इटाढ़ी, कलावती देवी (बिचौलिया) कोरान सराय, जगजीवन चौहान – औद्योगिक थाना, हैदर खां (नकली पुलिस) – मुफस्सिल के रूप में हुई। पुलिस ने इन अभियुक्तों के पास से नकदी 38,500 रुपये, एक ऑटो, एक जोड़ी कान की बाली, एक जोड़ी पायल और पांच सेट मोबाइल बरामद किए हैं। इस उद्भेदन में एसडीपीओ गौरव पाण्डेय मुफस्सिल थानाध्यक्ष शंभु कुमार भगत, अपर थानाध्यक्ष चंदन कुमार और मुफस्सिल थाने के सशस्त्र बल की अहम भूमिका रही।






























































































