बच्चे को जन्म देने अस्पताल पहुंची मां, ऑपरेशन के कारण मौत, परिवार ने किया हंगामा

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-घर वालों के विरोध के बाद भी खामोश रहा प्रशासन
बक्सर खबर। बाइस-तेइस साल की रिंकू देवी पहली बार मां बनने वाली थी। पति-पत्नी का परिवार पूरा होने वाला था। लेकिन, रिंकू को क्या पता था। बच्चे का जन्म मां की मौत का कारण बन जाएगा। प्रसव के लिए उसे कृष्णाब्रह्म के साई इमरजेंसी अस्पताल में दाखिल कराया गया। शुक्रवार की तड़के तीन बजे के लगभग ऑपरेशन हुआ। चार बजे डॉक्टरों ने बताया उसकी हालत बिगड़ रही है। शहर के गोलंबर स्थित एक निजी अस्पताल रेफर कर दिया गया। वहां पहुंचकर उसकी मौत हो गई। परिजनों को वहां से एक कागज थमा दिया गया।

उसकी लाश लेकर ऑटो रिक्शा पर परिवार वाले पुन: साई अस्पताल पहुंचे और हंगामा किया। उनका मानना था, हल्ला हंगामा होता तो पुलिस हस्तक्षेप करेगी। कृष्णाब्रह्म थाने को सूचना दी गई। पुलिस आई लेकिन, उसने पीड़ित पक्ष की शिकायत नहीं ली। वहां से सभी को चलता किया। रिंकू मुरार थाना के कोन्हीं गांव निवासी उमेश की पत्नी थी। इसकी शिकायत शुक्रवार को ही परिजनों ने बक्सर खबर से की थी। उन्हें इंसाफ नहीं मिला, इस तरह के अस्पताल न जाने कितने लोगों की जान लेंगे। इनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। यह कहना था उस दुखी परिवार का।

कृष्णाब्रह्म का साईं अस्पताल जहां हुआ था ऑपरेशन

जब उनसे यह पूछा गया। आप इस अस्पताल के चक्कर में फंसे कैसे। जब मामला ऑपरेशन की स्थिति थी तो किसी अच्छे अस्पताल का रुख करना चाहिए था। उन लोगों ने बताया, हमारे ही परिवार के एक जानने वाले ने हमें वहां तक पहुंचा दिया। हालांकि उन लोगों ने बताया, बच्चा कुशल है। ग्रामीण अस्पतालों में अक्सर इस तरह के जानलेवा ऑपरेशन होते हैं। वस्तु स्थिति को जानने के लिए सबसे पहले कृष्णाब्रह्म थाने से संपर्क किया गया। थानाध्यक्ष ने कहा, हमें सूचना मिली तो टीम भेजी गई। लेकिन, वहां काफी हंगामा रहा रहा था। विधि व्यवस्था की समस्या पैदा नहीं हो। इस वजह से वहां से भीड़ को हटाया गया। उसके बाद किसी ने हमें इसकी लिखित शिकायत नहीं दी।

पुलिस का पक्ष तो हमें उसी दिन ज्ञात हो गया। लेकिन, साई अस्पताल का नंबर अगले दिन मिला। एक नंबर पर फोन मिलाया तो सोनू नाम के व्यक्ति से बात हुई। जिसने खुद को अस्पताल का प्रबंधक बताया। पूछने पर कहा मरीज को कार्डियक अरेस्ट आने लगा, दो-तीन झटके आए तो उसे बक्सर को ग्लोबल अस्पताल भेजा। जहां उसने दम तोड़ दिया। हमारे यहां उसकी मौत नहीं हुई। वहां से मृत्यु प्रमाण पत्र भी निर्गत हुआ है। 22-23 वर्ष की युवती को प्रसव के दौरान हार्ट अटैक जैसी बात अटपटी जान पड़ी। जिस डॉक्टर ने उसका ऑपरेशन किया, उससे बात कराने का आग्रह करने पर साई अस्पताल के कथित प्रबंधक ने कुछ समय मांगा।

पुन: संपर्क करने पर बातें टालने लगा। इसके उपरांत उस अस्पताल से भी संपर्क का प्रयास किया गया। जिनसे रिंकू का मृत्यु प्रमाण पत्र जारी किया था। लेकिन, वहां के डॉक्टर ने फोन का जवाब नहीं दिया। इतनी तस्दीक के बाद भी रिंकू की मौत का असली कारण ज्ञात नहीं हो सका। लेकिन, खबर सिर्फ यह नहीं है, रिंकू की मौत हो गई। नस्तर से हत्या का खेल जो जिले में चल रहा है। इसके खिलाफ प्रशासन को सजग होना होगा। अगर ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई। तो न जाने कितनी और जाने अस्पताल के बेड़ पर जाएंगी।

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