पूर्व विधायक के आरोप निराधार और भ्रामक, मेरे पास सभी जमीनों के वैध कागजात: प्रदीप राय

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जमीन विवाद पर वैष्णवी ग्रुप के चेयरमैन ने तोड़ी चुप्पी, कहा- राजनीतिक द्वेष के कारण जनता को किया जा रहा गुमराह                                                                    बक्सर खबर। डुमरांव के पूर्व विधायक डॉ. अजीत कुमार सिंह द्वारा लगाए गए आरोपों पर पलटवार करते हुए वैष्णवी ग्रुप के चेयरमैन प्रदीप राय ने बुधवार को अपने आवास पर प्रेसवार्ता आयोजित की। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि उनके विरुद्ध लगाए गए सभी आरोप न केवल निराधार और तथ्यहीन हैं, बल्कि जनता को गुमराह करने का एक सुनियोजित प्रयास हैं। प्रदीप राय ने मीडिया के सामने जमीन से जुड़े कानूनी दस्तावेजों का हवाला देते हुए बताया कि संबंधित भूमि का मालिकाना हक पूरी तरह वैध है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पावर ऑफ अटॉर्नी 25 मई 2011 को सुदामा जी उपाध्याय, ललन जी उपाध्याय, विजय कुमार उपाध्याय और उनकी माता शिवपुजनी देवी ने विधिवत निबंधित पावर ऑफ अटॉर्नी के माध्यम से अखिलेश राय को जमीन बिक्री का अधिकार दिया था। कबाला इसी आधार पर 7 जून 2011 और बाद में 4 नवंबर 2016 को उनके नाम से बैनामा हुआ, जिसका दाखिल-खारिज भी सरकारी नियमों के अनुसार पूर्ण हो चुका है।

हस्ताक्षरों और अंगूठे के निशान पर उठाए जा रहे सवालों को खारिज करते हुए उन्होंने कहा कि यदि किसी को संदेह है, तो वे फॉरेंसिक जांच करा सकते हैं। सभी मूल दस्तावेज सरकारी अभिलेखों में उपलब्ध हैं। विभिन्न अदालती मामलों का जिक्र करते हुए प्रदीप राय ने बताया कि कई मामलों में उनके पक्ष में आदेश पारित हो चुके हैं। सिविल जज ने टीएस संख्या 390/2021 में स्पष्ट किया है कि निर्माण कार्य पर रोक लगाने का कोई आधार नहीं है। दाखिल-खारिज अपील और पुनरीक्षण वाद में भी सक्षम प्राधिकार द्वारा उनके पक्ष में आदेश दिए गए हैं। राजनकांत उपाध्याय द्वारा दायर टाइटल सूट पर उन्होंने कहा कि मामला अभी न्यायालय में विचाराधीन है। इसमें अभी तक न तो गवाही पूरी हुई है और न ही कोई अंतिम फैसला आया है। ऐसे में उन्हें दोषी ठहराना न्यायिक प्रक्रिया का उल्लंघन है। प्रदीप राय ने अंत में अपील की कि जनता और मीडिया भ्रामक प्रचार पर विश्वास न करें। उन्होंने कहा, पूर्व विधायक द्वारा लगाए गए आरोप पूरी तरह से राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित हैं। मेरे पास सभी वैधानिक दस्तावेज और साक्ष्य मौजूद हैं, जिन्हें आवश्यकता पड़ने पर सार्वजनिक रूप से प्रस्तुत किया जाएगा।

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