कथा के तीसरे दिन सती चरित्र, ध्रुव तपस्या और राजा परीक्षित प्रसंग से दिया जीवन का संदेश बक्सर खबर। चौसा में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन मंगलवार को मामाजी महाराज के कृपा पात्र आचार्य रणधीर ओझा ने कथा के माध्यम से जीवन के कई महत्वपूर्ण संदेश दिए। उन्होंने कहा कि किसी भी स्थान पर बिना निमंत्रण जाने से पहले यह अवश्य विचार कर लेना चाहिए कि वहां अपने गुरु, इष्ट या स्वयं का अपमान तो नहीं होगा। यदि अपमान की आशंका हो तो वहां जाना उचित नहीं है, चाहे वह स्थान अपने पिता का ही घर क्यों न हो। उन्होंने सती चरित्र के प्रसंग का उल्लेख करते हुए बताया कि भगवान शिव की बात न मानकर सती अपने पिता के घर चली गईं, जहां उन्हें अपमान का सामना करना पड़ा और अंततः उन्हें अग्नि में स्वयं को स्वाहा करना पड़ा। यह प्रसंग हमें आत्मसम्मान और विवेक का संदेश देता है।
कथा के दौरान ध्रुव चरित्र का वर्णन करते हुए बताया कि उत्तानपाद के पुत्र ध्रुव को सौतेली मां सुरुचि द्वारा अपमानित किया गया, लेकिन उनकी मां सुनीति ने धैर्य और संयम नहीं खोया। इसी धैर्य के कारण परिवार पर आने वाला बड़ा संकट टल गया। उन्होंने कहा कि परिवार को बचाए रखने के लिए धैर्य और संयम की अत्यंत आवश्यकता होती है। आचार्य रणधीर ओझा ने कहा कि भक्ति के लिए उम्र कोई बाधा नहीं होती। बचपन में ही बच्चों को भक्ति और अच्छे संस्कारों की शिक्षा देनी चाहिए, क्योंकि बचपन कच्ची मिट्टी की तरह होता है, जिसे जैसा चाहें वैसा आकार दिया जा सकता है। उन्होंने कहा कि मनुष्य अपने जीवन में जैसे कर्म करता है, उसी के अनुरूप उसे मृत्यु प्राप्त होती है। जब-जब संसार में पाप बढ़ता है, तब भगवान किसी न किसी रूप में अवतार लेकर धर्म की रक्षा करते हैं। कलयुग में भी यदि मनुष्य भगवान कृष्ण के बताए मार्ग पर चले तो उसका जीवन सफल हो सकता है।
राजा परीक्षित के प्रसंग का वर्णन करते हुए कहा कि अहंकार मनुष्य को पतन की ओर ले जाता है। उन्होंने कहा कि नारायण की भक्ति में ही परम आनंद है। भगवान प्रेम के भूखे हैं और वासनाओं का त्याग करके ही प्रभु से मिलन संभव है। जो व्यक्ति भागवत कथा का श्रवण करता है, उस पर भगवान की कृपा सदैव बनी रहती है। इस अवसर पर प्रेम दुबे, मुन्ना दुबे, सत्येंद्र दुबे और प्रमोद दुबे समेत अनेक श्रद्धालुओं की सहभागिता सराहनीय रही।



































































































