‌‌‌गुरु काहे गरम हो, व्यवस्था खराब है तो क्या हो गया, मौन रहो अमावस्या है

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बक्सर खबर (गुरू गरम है)। गुरू का माथा भिन्नाया हुआ है। क्योंकि शहर की सड़कों और गंगा घाटों के आस-पास लोग ठंड की रात में, गंदगी के मध्य चादर डाल खुले आसमान के नीचे सनातनी नगर का सच देख रहे हैं। इन का लोगों दर्द बयां करना कठिन है। लेकिन, सनातन की राह में तपस्या तो आम बात है। ‘तपस्या’ का उल्लेख इस लिए कर रहा हूं। क्योंकि जो अव्यवस्था नगर में है। अगर उसके मध्य किसी को रख दिया जाए तो वह श्राप ही देगा। यह हाल आज शनिवार की शाम शहर का। हजारो की संख्या में श्रद्धालु मौनी अमावस्या के स्नान के लिए बक्सर पहुंच चुके हैं।

इसमें बहुतेरे ऐसे भी हैं। जो गैर जिलों के हैं। कुछ दूसरे देश ( नेपाल) से आए हैं। लेकिन, गरीबों के रहनुमा वाले इस नगर की तंग सड़कों पर उन्हें वाहन खड़ा करने तक की जगह नसीब नहीं है। क्योंकि किला मैदान बंद है। अनुमति दी गई है। मैदान और किला के मध्य में गंदगी की तरफ जाइए। ऐसा नहीं है, उधर भी इंसान रहते हैं। झुग्गी में हैं तो क्या हुआ। वे भी सनातन को मानते हैं। आप भी मानते हैं। जाइए वहीं समय गुजारीए, शहर का सिस्टम बिजी है। अधिकारी परीक्षा की तैयारी में हैं। उन लोगों ने मौनी अमावस्या के लिए आदेश जारी कर रखा है। ब्रह्म मुहूर्त में शहर का ट्रैफिक रोक दिया जाएगा। बहुत भीड़ न हो, इसका ध्यान रखा गया है।

रही बात नेताओं की तो उनका क्या। विकास की बैठके होंगी, सभाओं में भाषण, काम बोल रहा है, उसका क्रेडिट लिया जाएगा। लेकिन, मौनी अमावस्या के मेले में आने वाले परेशान हैं तो इस अव्यवस्था का क्रेडिट तो सरकार को जाता है। पूरा देश परेशान है, विश्व परेशान हैं। सुविधा का ही आनंद लेना है तो घर पर रहते। इस ठंड में यहां आने की क्या जरूरत है। इस अंतर्द्वंद में उलझे गुरू परेशान हैं। क्या करें लिखें, कोई पढ़ता है। एक हम ही हैं क्या, जो सिस्टम को समझाने चले हैं। अरे साहब मौनी अमावस्या है, चुप रहिए, आदत डालिए, नेताओं और अधिकारियों की प्रशंसा करिए। बोलिए मत, मेलार्थियों का दर्द बर्दाश्त नहीं हो रहा तो कुछ लिए लीजिए, पर बोलिए मत, मौनी अमावस्या है, कुछ सीखिए, क्या ! (नोट – गुरू गरम है, बक्सर खबर का साप्ताहिक कॉलम है। जो प्रत्येक शनिवार को प्रकाशित होता है। इसमें हम अव्यवस्था का निशाना बनाते हैं। )

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