नगर परिषद की पहल पर वीर कुंवर सिंह चौक की लौटी रौनक, चेयरमैन ने कहा- यह सिर्फ घड़ी नहीं, शहर की पहचान की वापसी है बक्सर खबर। फिल्मों में आपने कई बार देखा होगा कि मां-बेटे या जुड़वा भाई-बहन कुंभ के मेले में बिछड़ जाते हैं और फिर 20 साल बाद कहानी के आखिर में मिल जाते हैं। कुछ वैसा ही नजारा रविवार की शाम शहर में भी देखने को मिला, जब करीब 20 साल बाद घंटाघर की बंद पड़ी घड़ी फिर से चल पड़ी और ‘टन-टन’ की आवाज ने पूरे इलाके को चौंका दिया। शहर के पुलिस चौकी नंबर एक पर बने घंटाघर की घड़ी वर्षों पहले खराब हो गई थी। घड़ी की सुइयां थम गई थीं और उसकी पहचान बन चुकी आवाज भी खामोश हो गई थी। इन दो दशकों में शहर के निजाम बदले, सरकारें आईं-गईं, लेकिन इस ऐतिहासिक घंटाघर पर किसी का ध्यान नहीं गया।
बीच के वर्षों में एक गैर-राजनीतिक संगठन की पहल पर इसी परिसर में स्वतंत्रता सेनानी बाबू वीर कुंवर सिंह की प्रतिमा स्थापित की गई। इसके बाद यह स्थान वीर कुंवर सिंह चौक के नाम से पहचाना जाने लगा। चौक की पहचान बनी रही, मगर घंटाघर की घड़ी अब भी समय से बिछड़ी रही। अब नगर परिषद की वर्तमान सरकार ने इस ओर ध्यान दिया। सभापति कमरून निशा के निर्देश पर पिछले कई महीनों से घंटाघर के जीर्णोद्धार और सौंदर्यीकरण का काम चल रहा है। इसी कड़ी में रविवार की शाम चारों दिशाओं में लगी विशालकाय घड़ियां फिर से चल पड़ीं और लंबे अरसे बाद घंटाघर से ‘टन-टन’ की आवाज सुनाई दी। वहां मौजूद समाजसेवी ओम जी यादव ने कहा कि मैंने तो कभी इस घंटाघर की घड़ी से इसकी आवाज नही सुनी थी। आज जब टन-टन की आवाज सुनी, तो दिल खुश हो गया। नगर परिषद शहर के लिए अच्छा काम कर रही है, इसके लिए धन्यवाद।

वहीं चेयरमैन प्रतिनिधि नियामतुल्लाह फरीदी ने बताया कि वीर कुंवर सिंह चौक शहर का हृदय स्थल है। यहीं से प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व वाले रामरेखा घाट, बक्सर किला, नाथ बाबा मंदिर, नौलखा मंदिर की ओर जाते हैं और यही शहर में प्रवेश का मुख्य मार्ग भी है। उन्होंने कहा कि घंटाघर की घड़ी और उसकी आवाज वर्षों से बंद थी, जिसकी शिकायत शहर के कई गणमान्य लोगों ने की थी। शहर के विकास, सुंदरता और लोगों की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए नगर परिषद ने इसके जीर्णोद्धार का फैसला लिया। फरीदी के अनुसार, घंटाघर की चारों पुरानी घड़ियों को हटाकर नई घड़ियां लगाई गई हैं। साथ ही टन-टन की आवाज के लिए नया साउंड सिस्टम लगाया गया है, जिसमें चारों दिशाओं में छोटे-छोटे हॉर्न लगाए गए हैं। फिलहाल टेस्टिंग का काम चल रहा है और जल्द ही घंटाघर का सौंदर्यीकरण व जीर्णोद्धार पूरी तरह पूरा कर लिया जाएगा। करीब 20 साल बाद जब घंटाघर ने फिर से समय बताना शुरू किया, तो यह सिर्फ एक घड़ी की वापसी नहीं थी, बल्कि शहर की यादों और पहचान की भी वापसी थी।






























































































