बक्सर खबर : आज अक्षय नवमी है। इसे कुछ लोग आंवला नवमी भी कहते हैं। भारतीय (अध्यात्मिक) परंपरा के अनुसार लोग व्रत करते हैं, आंवला का पूजन करते हैं, आंवला के नीचे भोजन बनाते और प्रसाद ग्रहण करते हैं। ऐसा माना जाता है कि आज के दिन किए गए पुण्य कार्य का क्षय नहीं होता। इस दिन दान-पुण्य का विशेष लाभ होता है। कुछ लोग गुप्तदान भी करते हैं। ग्रामीण परिवेश में लोग पेड़ के नीचे भोजन बनाते हैं, लोगों को प्रसाद ग्रहण कराया जाता है, किसान इस तिथि को दही-चुणा भी खाते-खिलाते हैं।

शास्त्रीय मान्यता
बक्सर : ऐसा माना जाता है कि भगवान विष्णु कार्तिक मास की नवमीं को आंवला वृक्ष के नीचे निवास करते हैं। वे पूर्णिमा तक वृक्ष के नीचे रहते हैं। जिनकी आराधना पूजन से विशेष फल प्राप्त होता है। पुत्र प्राप्ति के लिए भगवान विष्णु के साथ आंवला पुजन का विशेष महत्व है।

वैज्ञानिक महत्व
बक्सर : सनातन धर्म में ही वृक्ष पूजन के विधान मिलते हैं। आंवला पूजन के पीछे यह कारण बताया जाता है कि कार्तिक मास में ठंड का प्रभाव शुरु हो जाता है। मौसम बदलने के कारण वायरल फीवर और मौसमी बीमारियां लोगों के स्वास्थ्य पर प्रभाव डालती हैं। इस मौसम में आंवला फल देता है। जिसके सेवन से प्रतिरोधक क्षमता का विकास होता है। फल का रस बीमारियों को हमसे दूर रखता है। फल देने वाले वृक्ष में आंवला और आम ऐसे है जिसकी हिंदू धर्म में पूजा होती है। इसके अलावा तुलसी, पिपल, नीम आदि की पूजा भी होती है। जो अपने गुण के कारण मानव जाती के लिए वरदान स्वरुप हैं।

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