—-जिला अधिवक्ता संघ ने आयोजित की श्रद्धांजलि सभा, वक्ताओं ने कहा- कानून और साहित्य के संगम थे मिश्र जी बक्सर खबर। न्याय, विधि और साहित्य के क्षेत्र में अमिट योगदान देने वाले वरिष्ठ अधिवक्ता, शिक्षाविद एवं प्रख्यात साहित्यसेवी स्व. घनश्याम मिश्र की 20वीं पुण्यतिथि के अवसर पर मंगलवार को जिला अधिवक्ता संघ के तत्वावधान में एक गरिमामय श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम केवल पुण्यतिथि का औपचारिक आयोजन नहीं, बल्कि उनके विचारों, लेखनी और न्यायप्रिय जीवन को याद करने का भावनात्मक अवसर बना। कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ अधिवक्ता बबन ओझा, अध्यक्ष, जिला अधिवक्ता संघ ने की, जबकि मंच संचालन वरीय अधिवक्ता रामेश्वर प्रसाद वर्मा ने किया। अपने संयत और साहित्यिक संचालन से उन्होंने पूरे कार्यक्रम को विशेष गरिमा प्रदान की। सभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि स्व. घनश्याम मिश्र केवल एक कुशल अधिवक्ता नहीं थे, बल्कि वे न्यायिक चेतना के संवाहक और विधि शिक्षा के प्रेरणास्रोत थे।
जननायक कर्पूरी ठाकुर लॉ कॉलेज में अध्यापन के दौरान उन्होंने विद्यार्थियों को न सिर्फ कानून सिखाया, बल्कि न्याय, नैतिकता और सामाजिक जिम्मेदारी का पाठ भी पढ़ाया। वक्ताओं ने कहा कि स्व. मिश्र का साहित्यिक योगदान भोजपुरी भाषा के लिए एक अमूल्य धरोहर है। उन्होंने गीता जैसे शास्त्रीय ग्रंथों सहित कई धार्मिक, साहित्यिक और विधिक रचनाओं का भोजपुरी में अनुवाद कर उन्हें आम लोगों तक पहुंचाया। उनके द्वारा किया गया गीता, अमरावती कथा संग्रह, चकबंदी विधान, तुलसीकृत पार्वती मंगल और जानकी मंगल का भोजपुरी अनुवाद, भाषा और विचार के बीच सेतु का कार्य करता है।विशेष रूप से उनके अनूदित अंश चानी के झूझना का एम.ए. पाठ्यक्रम में शामिल होना, उनकी साहित्यिक साधना की बड़ी उपलब्धि मानी जाती है। वक्ताओं ने कहा कि उन्होंने यह साबित किया कि भोजपुरी सिर्फ बोलचाल की भाषा नहीं, बल्कि विचार, दर्शन और विधि की भी समर्थ भाषा है। श्रद्धांजलि सभा में एडीजे मनीष कुमार शुक्ला, प्रधान न्यायाधीश मनोज कुमार, एडीजे अनुपमा कुमारी, एडीजे नेहा त्रिपाठी, सब जज भोला सिंह सहित अन्य न्यायिक पदाधिकारी उपस्थित रहे। इसके अलावा अधिवक्ता बिन्देश्वरी पाण्डेय उर्फ पप्पू पाण्डेय, रामनाथ ठाकुर, शशिकांत उपाध्याय, हृदय नारायण मिश्रा, पुर्नेंदु कुमार मिश्रा, दिव्य प्रकाश शर्मा, सुमन प्रकाश पाण्डेय, अनिल पाण्डेय, मनीष पाठक, केदारनाथ सिंह, अरुण कुमार ओझा, उनके सुपुत्र डॉ. कन्हैया मिश्रा, कपिंद्र किशोर सहित जिला अधिवक्ता संघ के वरिष्ठ-कनिष्ठ अधिवक्ता, साहित्यकार, शिक्षाविद, समाजसेवी मौजूद रहे।



























































































