बाल संरक्षण पुलिस पदाधिकारियों को मिला कानून का व्यावहारिक पाठ

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जिला विधिक सेवा प्राधिकार में एकदिवसीय प्रशिक्षण, किशोर न्याय अधिनियम के प्रावधानों पर हुआ विस्तार से मंथन                                                                      बक्सर खबर। सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के आलोक में तथा बिहार राज्य विधिक सेवा प्राधिकार के निर्देश पर मंगलवार को जिला विधिक सेवा प्राधिकार कार्यालय परिसर में कार्यरत सभी बाल संरक्षण पुलिस पदाधिकारियों का एकदिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य किशोर न्याय अधिनियम, 2015 (संशोधित 2021) एवं बिहार किशोर न्याय नियमावली, 2017 के प्रावधानों की व्यावहारिक जानकारी देना था। कार्यक्रम के मुख्य प्रशिक्षक हर्षवर्धन सिंह, प्रधान दंडाधिकारी, किशोर न्याय परिषद ने उपस्थित पदाधिकारियों को विस्तार से प्रशिक्षण दिया। उनके साथ प्रकाश कुमार, परामर्शदाता, जिला बाल संरक्षण इकाई ने भी महत्वपूर्ण बिंदुओं पर मार्गदर्शन किया।

प्रशिक्षण के दौरान हर्षवर्धन सिंह ने बताया कि किशोर न्याय अधिनियम की धारा 107 के तहत विशेष किशोर पुलिस इकाई एवं बाल कल्याण पुलिस पदाधिकारी का गठन अनिवार्य है। इस व्यवस्था में पुलिस उपाधीक्षक रैंक के अधिकारी को विशेष किशोर पुलिस नोडल पदाधिकारी बनाया जाता है, जबकि जिले के प्रत्येक थाना में कम से कम सब-इंस्पेक्टर रैंक के एक बाल कल्याण पुलिस पदाधिकारी की नामिती आवश्यक है। उन्होंने बताया कि बिहार किशोर न्याय नियमावली 2017 की धारा 8 के अनुसार बाल कल्याण पुलिस पदाधिकारी को विधि से विवादित बालकों से जुड़े मामलों की सूचना दैनिक डायरी में अंकित करनी होती है। साथ ही प्रारूप-01 के तहत बालक की सामाजिक पृष्ठभूमि एवं कथित अपराध से संबंधित जानकारी किशोर न्याय परिषद को उपलब्ध करानी होती है। प्रशिक्षक ने कहा कि सामाजिक पृष्ठभूमि रिपोर्ट का मुख्य उद्देश्य घटना की वास्तविक स्थिति को समझना, भौतिक सत्यापन करना तथा यह जानना है कि बालक की घटना में कितनी और किस प्रकार की संलिप्तता है। इस रिपोर्ट के आधार पर किशोर न्याय परिषद बालक के भविष्य को ध्यान में रखते हुए उचित निर्णय लेती है।

फोटो – कार्यशाला में उपस्थित पुलिस पदाधिकारियों व अन्य को संबोधित करते मुख्य प्रशिक्षक हर्षवर्धन सिंह

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि धारा 8 की उपधारा (2) व (3) के तहत बाल कल्याण पुलिस पदाधिकारी को 24 घंटे के भीतर बालक को किशोर न्याय परिषद अथवा बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रस्तुत करना अनिवार्य है। इस दौरान बालकों को हथकड़ी या बेड़ी नहीं लगाई जाएगी। विधि से विवादित बालकों को किशोर न्याय परिषद के समक्ष तथा देखरेख एवं संरक्षण की आवश्यकता वाले बच्चों को बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। प्रशिक्षण सत्र के दौरान उपस्थित पुलिस पदाधिकारियों ने अपने-अपने प्रश्न भी रखे, जिनका प्रशिक्षकों द्वारा संतोषजनक उत्तर दिया गया। कार्यक्रम में कार्यालय कर्मी सुधीर कुमार, दीपेश कुमार, सुमित कुमार, सुनील कुमार, मनोज कुमार रवानी, मोहम्मद अकबर अली सहित अन्य कर्मी मौजूद रहे।

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