कर्बला की याद में निकला ताजिया जुलूस, देश की शान कर्नल सोफिया को किया सलाम 

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शहर के विभिन्न मोहल्लों से निकले अखाड़े, शांति और सौहार्द के साथ मनाया गया पर्व                            बक्सर खबर। इस्लामिक नया साल और इमाम हुसैन की शहादत की याद में मनाया जाने वाला मोहर्रम शनिवार की रात और रविवार की शाम को पूरे जिले में श्रद्धा, शोक और शांति के साथ मनाया गया। शहर के डबल अखाड़ा सराय फाटक, खलासी मोहल्ला, ठठेरी बाजार, दर्जी मोहल्ला, सोहनी पट्टी, कोईरपुवा, गजाधर गंज, मुसाफिर गंज, नई बाजार, सारीमपुर और सिविल लाइन सहित कई मोहल्लों से अखाड़ा और आकर्षक ताजिया निकाले गए।

जुलूस के दौरान बच्चे, युवा और बुजुर्ग “या हुसैन”, “या अली” के नारों के साथ पूरे शहर में जुलूस निकालते नजर आए। विभिन्न चौक-चौराहों और इमामबाड़ों के पास लाठी और अल्लाह हथियारों से परंपरागत कौशल का प्रदर्शन किया गया। ढोल-ताशों और बजा के साथ निकले जुलूसों ने लोगों का ध्यान आकर्षित किया। जगह-जगह पानी, खिचड़ा और शरबत के सेवा स्टॉल लगाए गए थे, जहां हजारों की संख्या में लोगों ने श्रद्धा से प्रसाद ग्रहण किया। इन सेवाओं की व्यवस्था विभिन्न मोहल्ला कमेटियों और सामाजिक संगठनों ने की थी। मोहर्रम के मौके पर जिले भर में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रही। प्रशासन की ओर से सभी प्रमुख स्थानों पर पुलिस बल की तैनाती की गई थी। अधिकारियों ने खुद भी चौकसी बरतते हुए आयोजन की निगरानी की।

ठठेरी बाजार में मोहर्रम के अखाड़ा में लाठी का खेल दिखाते युवक

रहमानिया मस्जिद के इमाम मौलाना इमरान शम्सी ने बताया कि मुहर्रम का महीना सिर्फ शोक का नहीं, बल्कि बलिदान, इंसाफ और सच्चाई के लिए डटे रहने की सीख देता है। रोज-ए-आशुरा के दिन कर्बला में इमाम हुसैन और उनके साथियों ने सत्य और न्याय के लिए अपने प्राण त्याग दिए थे।

कर्नल सोफिया कुरैशी की तस्वीर के साथ जुलूस में शामिल युवाओं की टोली

मोहर्रम के मौके पर सराय फाटक मोहल्ले के जोश से भरे युवाओं की एक टोली ने जुलूस में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। इस बार जुलूस में खास बात यह रही कि युवाओं ने “ऑपरेशन सिंदूर” से देशभर में पहचान बनाने वाली कर्नल सोफिया कुरैशी की तस्वीर के साथ शामिल होकर उन्हें सम्मान दिया। जुलूस के दौरान “या हुसैन, या हसन, या अली” के नारों से माहौल गूंज उठा और पूरा नगर भ्रमण किया गया। शिया समुदाय जहां मातम, सीना कोबी और जंजीर जनी जैसे परंपरागत शोक अनुष्ठानों के जरिए इमाम हुसैन को याद करता है, वहीं सुन्नी समुदाय आशूरा के दिन रोजा रखकर पैगंबर की सुन्नत निभाता है। धार्मिक और सामाजिक नेताओं ने मोहर्रम के अवसर पर शांति, भाईचारा और एकता बनाए रखने की अपील की। प्रशासन और जनता के सहयोग से यह पर्व शांति, श्रद्धा और सौहार्द के माहौल में सम्पन्न हुआ।

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