नई शिक्षा नीति और पंच प्राण के संकल्पों के साथ संस्कारयुक्त शिक्षा देने पर मंथन, 300 से अधिक शिक्षक हुए शामिल बक्सर खबर। विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षण संस्थान के अंतर्गत संचालित भारती शिक्षा समिति एवं शिशु शिक्षा प्रबंध समिति के संयुक्त तत्वावधान में भोजपुर विभाग का तीन दिवसीय आचार्य सम्मेलन शनिवार से अहिरौली स्थित सरस्वती विद्या मंदिर में प्रारंभ हुआ। यह सम्मेलन 2 फरवरी तक चलेगा। उद्घाटन प्रदेश सचिव प्रदीप कुमार कुशवाहा ने दीप प्रज्वलित कर किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता समाजसेवी सतीश चंद्र त्रिपाठी ने की, जबकि विद्यालय के सचिव डॉ. हनुमान प्रसाद अग्रवाल ने आभार व्यक्त किया। संचालन विभाग निरीक्षक ब्रह्मदेव प्रसाद एवं गया विभाग प्रमुख उमाशंकर पोद्दार ने किया। अतिथियों का स्वागत उप प्रधानाचार्य मनोरंजन कुमार ने अंगवस्त्र प्रदान कर किया। सम्मेलन की प्रस्तावना विभाग प्रमुख लाल बाबू प्रसाद यादव ने रखी। मुख्य अतिथि प्रदीप कुमार कुशवाहा ने अपने संबोधन में कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा के अनुरूप शिक्षण कार्य को आगे बढ़ाते हुए पंच प्राण के संकल्प के तहत बच्चों के माध्यम से बेहतर समाज का विकास करना है।
उन्होंने आदर्श आचार्य की संकल्पना पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि शिक्षण पद्धति ऐसी होनी चाहिए जो विद्यार्थियों को नवीन विषयों के साथ संस्कारयुक्त जीवन मूल्यों से भी जोड़ सके। भारतीय ज्ञान परंपरा में वेद, उपनिषद, योग, आयुर्वेद, गणित, खगोल विज्ञान, दर्शन, भाषा एवं साहित्य का समावेश रहा है, जिसका आधुनिक शिक्षा पद्धति के साथ समन्वय आवश्यक है। इससे विद्यार्थियों में बौद्धिक विकास के साथ नैतिकता, अनुशासन, राष्ट्रप्रेम और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना भी विकसित होगी। प्रदेश सचिव ने कहा कि विद्यालयों में संस्कृत श्लोक, नैतिक कथाएं एवं महापुरुषों के जीवन प्रसंगों को शिक्षण प्रक्रिया का हिस्सा बनाया जाना चाहिए। नई शिक्षा नीति के तहत भारतीय ज्ञान परंपरा को पाठ्यक्रम और सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों में शामिल करना समय की आवश्यकता है, ताकि विद्यार्थी आधुनिक ज्ञान के साथ अपनी सांस्कृतिक जड़ों से भी जुड़े रहें।

सम्मेलन के दूसरे दिन रविवार को गीत-संगीत, आशुवाचन, शारीरिक समता एवं सुलेख प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। भोजपुर और बक्सर जिले के विभिन्न सरस्वती शिशु मंदिरों एवं विद्या मंदिरों से आए आचार्यों एवं दीदी जी ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। पूरे परिसर में शैक्षणिक ऊर्जा और रचनात्मकता का वातावरण देखने को मिला। सम्मेलन में लगभग 300 से अधिक आचार्य एवं दीदी जी भाग लेकर विगत सत्र के कार्यक्रमों की समीक्षा तथा आगामी सत्र की रूपरेखा पर चिंतन-मंथन कर रहे हैं। इस दौरान बालक विकास, आचार्य विकास, विद्यालय विकास और अभिभावक विकास जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा हो रही है। कार्यक्रम में भोला केसरी, उमाशंकर पोद्दार, सतीश कुमार सिंह, धरनी कांत पांडेय, परमेश्वर कुमार, गंगा चौधरी, शैलेन्द्र कुमार, जैनेंद्र कुमार, प्रमोद कुमार, संजीव कुमार, मनोज पांडेय, नरेंद्र कुमार, अजीत दुबे, सुलेखा देवी सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
































































































