ऋषि-मुनियों की तपोभूमि अब कैनवास पर, नगर परिषद ने छेड़ा रंग-रोगन अभियान

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पौराणिक गौरव और आधुनिक विकास के संगम से सजेगी शहर की दीवारें, एक महीना चलेगा सौंदर्यीकरण का महापर्व                                                                    बक्सर खबर। शहरी क्षेत्र को सुंदर, आकर्षक और जागरूकता से भरपूर बनाने के लिए नगर परिषद इन दिनों पूरी सक्रियता के साथ रंग-रोगन और पेंटिंग अभियान चला रही है। शहर के सार्वजनिक स्थलों, सरकारी भवनों, विद्यालयों, नालियों के किनारे सरकारी दीवारों पर रंगीन चित्रों के जरिए शहर को नया रंग और नया रूप दिया जा रहा है। यह अभियान सिर्फ सौंदर्यीकरण तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके माध्यम से जन-जागरण का संदेश भी दिया जा रहा है। नगर परिषद द्वारा दीवारों और भवनों पर बक्सर की धार्मिक पहचान, गौरवशाली इतिहास और सांस्कृतिक विरासत को उकेरा जा रहा है।

महर्षि विश्वामित्र की तपोभूमि के रूप में विख्यात बक्सर की धरती पर गौतम ऋषि, च्यवन ऋषि, भृगु ऋषि, नारद ऋषि सहित सैकड़ों ऋषि-मुनियों का ऐतिहासिक जुड़ाव रहा है। इन्हीं पौराणिक और धार्मिक प्रसंगों को पेंटिंग के माध्यम से आम लोगों तक पहुंचाने की कोशिश की जा रही है। साथ ही नगर की स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण, शिक्षा, वैज्ञानिक और तकनीकी सोच तथा खेल के क्षेत्र में करियर की संभावनाओं को भी चित्रों के जरिए दर्शाया जा रहा है। रंग-बिरंगी और आकर्षक पेंटिंग से खासकर युवाओं को सकारात्मक संदेश देने और उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करने का प्रयास किया जा रहा है।

फोटो – किला मैदान में भारत के स्टार खिलाड़ियों और जिला शिक्षा कार्यालय भवन पर पर्यावरण संरक्षण का संदेश देती पेंटिंग

चेयरमैन प्रतिनिधि नियामतुल्लाह फरीदी ने बताया कि एमपी हाई स्कूल, किला मैदान, बुनियादी विद्यालय स्थित जिला शिक्षा पदाधिकारी कार्यालय, प्रखंड शिक्षा कार्यालय, जेल घाट, सिपाही घाट, रामरेखा घाट समेत शहर की कई सरकारी दीवारों और सार्वजनिक स्थलों पर रंग-रोगन का कार्य तेजी से चल रहा है। उन्होंने बताया कि दो वर्ष पूर्व रामरेखा घाट पर लोक आस्था के महापर्व छठ से जुड़ी पेंटिंग कराई गई थी, जिसे लोगों ने काफी सराहा था। इस वर्ष नगर परिषद ने पूरे शहरी क्षेत्र को रंगीन और आकर्षक बनाने का बीड़ा उठाया है। यह अभियान पूरे जनवरी माह तक चलेगा। उम्मीद है कि इस पहल से न सिर्फ बक्सर की सुंदरता बढ़ेगी, बल्कि शहरवासियों में स्वच्छता, संस्कृति और विकास के प्रति नई चेतना भी जागेगी।

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