बक्सर खबर। अच्छी खबरें पढ़ने की इच्छा रखने वालों के लिए बुरी खबर है। इसके लिए जो भी जिम्मेवार हैं। उन सबके लिए डूब मरने वाली बात है। जिले के नावानगर प्रखंड में पिछले कुछ दिनों के अंदर पांच कुपोषित बच्चे मिले हैं। एक दिन पहले अर्थात 13 जुलाई को नावानगर अस्पताल से आठ माह के मोहित कुमार को बक्सर रेफर किया गया। रेंका गांव के निवासी मुनमुन साह के पुत्र को प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र में दाखिल कराया गया था। वहां से उसे एनआरसी केन्द्र रेफर किया गया। जब यह खबर मीडिया को लगी तो अस्पताल के आंकड़ों पर नजर डाली गई। पता चला कि यह इकलौता केस नहीं है। अन्य चार बच्चे भी कुपोषण के शिकार पाए गए हैं।
जिनमें सत्यम कुमार 11 माह पुत्र छोटन साह ग्राम रेंका, लवली कुमार 3 वर्ष, पुत्री जगन्नाथ पाल, ग्राम ईकील, प्रीति कुमारी ढ़ाई वर्ष, पुत्री सुशील राम ग्राम बेलहरी, हसिना खातुन पांच वर्ष, पुत्री महबूब अंसारी, ग्राम बेलहरी। ऐसा नहीं है कि यह खबर सिर्फ बक्सर खबर को पता है। स्वास्थ्य विभाग से इससे अनजान नहीं है। क्योंकि परिवार एवं कल्याण मंत्रालय इस तरह के आंकड़ों पर नजर रखता हैं। सभी चिकित्सकों को पता है। अगर ऐसे मामले सामने आते हैं। तो स्वास्थ्य विभाग के साथ आंगनबाड़ी केन्द्र तक पर सवाल खड़े होंगे। लेकिन, इतना सब कुछ होने के बावजूद बड़े अधिकारी क्या कर रहें हैं। वे तो वही जाने, क्योंकि वाजिब सवाल का माकूल जवाब देने वाले लोग अपने पद की ठसक में जीते हैं। अगर ऐसा नहीं होता तो। ऐसी खबरें सामने आने के बाद प्रशासन स्वयं बयान जारी करता। जो आजकल देखने को नहीं मिलता।






























































































