बक्सर धाम में श्रद्धालुओं की उपेक्षा बर्दाश्त नहीं: विश्वामित्र सेना

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मौनी अमावस्या की पूर्व संध्या पर सिपाही घाट पर मैत्री भोज का आयोजन, राजकुमार चौबे ने प्रशासनिक कुव्यवस्था पर उठाए गंभीर सवाल                                                    बक्सर खबर। अध्यात्म की नगरी बक्सर में मौनी अमावस्या की पूर्व संध्या पर विश्वामित्र सेना के राष्ट्रीय संयोजक राजकुमार चौबे का आगमन हुआ। इस दौरान उन्होंने सिपाही घाट पर आयोजित मैत्री भोज में शिरकत की और जिला प्रशासन की कार्यशैली पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि दूर-दराज से आए श्रद्धालुओं की दुर्दशा को संगठन कतई बर्दाश्त नहीं करेगा। शनिवार को ठोरा और गंगा के संगम तट स्थित सिपाही घाट पर विश्वामित्र सेना द्वारा मैत्री भोज का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में साधु-संतों, पुजारियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने पारंपरिक लिट्टी-चोखा का प्रसाद ग्रहण किया। इस अवसर पर भगवान वामन चेतना मंच के पदाधिकारी भी उपस्थित रहे। राजकुमार चौबे ने बताया कि 22 जनवरी को विश्वामित्र सेना का प्रथम स्थापना दिवस ‘सेवा दिवस’ के रूप में मनाया जाएगा। इस अवसर पर जिले का सबसे बड़ा कंबल वितरण कार्यक्रम होगा, जिसमें लगभग 20 हजार जरूरतमंदों को सहायता पहुंचाई जाएगी। स्थापना दिवस पर धार्मिक धरोहरों की रक्षा और बक्सर की पौराणिक पहचान को पुनर्जीवित करने के लिए जागरूकता अभियान भी चलाया जाएगा।

मौनी अमावस्या के स्नान के लिए नेपाल के तराई क्षेत्रों और मोतिहारी जैसे जिलों से हजारों श्रद्धालु बक्सर पहुंच चुके हैं। राजकुमार चौबे ने नगर और जिला प्रशासन को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि श्रद्धालु किला मैदान और रामरेखा घाट के आसपास खुले में रात गुजारने को मजबूर हैं। प्रशासन ने उनके ठहरने या बैठने की कोई समुचित व्यवस्था नहीं की है। अगर भविष्य में धार्मिक नगरी में श्रद्धालुओं के साथ ऐसा व्यवहार जारी रहा, तो विश्वामित्र सेना उग्र आंदोलन को मजबूर होगी। मान्यता है कि मौनी अमावस्या पर बक्सर के रामरेखा घाट पर स्नान के बाद श्रद्धालु यहां से पवित्र गंगाजल लेकर नेपाल सीमा के करीब स्थित अरेराज मंदिर में जलाभिषेक के लिए प्रस्थान करते हैं। इतनी बड़ी धार्मिक महत्ता होने के बावजूद बुनियादी सुविधाओं का अभाव अब एक बड़ा मुद्दा बन गया है।

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