दाखिल-खारिज और परिमार्जन में देरी पर नाराजगी, 75 दिनों के भीतर निष्पादन का अल्टीमेटम बक्सर खबर। जिले में राजस्व एवं भूमि सुधार से जुड़े कार्यों को और अधिक पारदर्शी, त्वरित व गुणवत्तापूर्ण बनाने के उद्देश्य से शनिवार को समाहरणालय सभाकक्ष में उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता प्रदेश के राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के प्रधान सचिव सीके अनिल ने की। बैठक में जिलाधिकारी साहिला, अपर समाहर्ता अरुण कुमार सिंह, बंदोबस्त पदाधिकारी, जिला भू-अर्जन पदाधिकारी, दोनों अनुमंडल के भूमि सुधार उप समाहर्ता, सभी अंचलाधिकारी, राजस्व पदाधिकारी सहित विभाग के अन्य अधिकारी उपस्थित रहे। प्रधान सचिव ने स्पष्ट निर्देश दिया कि बक्सर जिले को राजस्व मामलों में आदर्श जिला के रूप में विकसित किया जाए। इसके लिए सभी स्तरों पर कार्यों में पारदर्शिता, गति और गुणवत्ता सुनिश्चित करना अनिवार्य होगा।
समीक्षा के दौरान दाखिल–खारिज, म्यूटेशन, परिमार्जन, आधार सीडिंग, भू-लगान, आरओआर, लैंड बैंक, जन शिकायत, राजस्व महा अभियान, राजस्व न्यायालय एवं भू-अर्जन से जुड़े मामलों की विस्तार से समीक्षा की गई। सभी अंचलाधिकारियों को निर्देश दिया गया कि वे राजस्व कर्मचारियों एवं अमीन की दैनिक डायरी अनिवार्य रूप से संधारित कराएं और उनके कार्यों की नियमित समीक्षा करें। साथ ही सभी राजस्व कर्मचारियों का आधिकारिक ई-मेल आईडी बनाकर उसे सार्वजनिक करने को कहा गया। प्रधान सचिव ने प्रशासनिक और अर्द्ध-न्यायिक कार्यों में संविधान के अनुच्छेद 14 के तहत समानता के सिद्धांत का सख्ती से पालन करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि किसी भी तरह का भेदभाव, पक्षपात या चयनात्मक निर्णय स्वीकार्य नहीं होगा। समान परिस्थितियों में अलग-अलग निर्णय होने पर उसका स्पष्ट लिखित कारण दर्ज करना अनिवार्य होगा। राजस्व महा अभियान की प्रगति पर नाराजगी जताते हुए प्रधान सचिव ने सभी अंचलाधिकारियों को दो दिनों के भीतर प्रतिवेदन अपलोड करने और आधार सीडिंग का कार्य शत-प्रतिशत पूरा करने का निर्देश दिया।

प्रत्येक अंचल में लैंड बैंक के निर्माण को प्राथमिकता देते हुए 15 जनवरी से पहले सभी संबंधित कार्य पूरे करने को कहा गया। सरकारी भूमि के डिजिटलीकरण को शीघ्र पूरा करने, बिना सक्षम अनुमति के की गई जमाबंदी को निरस्त कराने का प्रस्ताव तुरंत भेजने और सरकारी भूमि से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई नियमित व सख्ती से करने के निर्देश भी दिए गए। प्रधान सचिव ने विशेष रूप से कहा कि भूमिहीन अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति परिवारों को नियमानुसार सरकारी भूमि पर समयबद्ध ढंग से दखल दिलाना सभी अंचलाधिकारियों की प्राथमिक जिम्मेदारी होगी। परिमार्जन मामलों पर जोर देते हुए उन्होंने निर्देश दिया कि सभी प्रकरणों का निष्पादन अधिकतम 75 दिनों के भीतर किया जाए। वहीं एक जनवरी तक लंबित सभी आवेदनों का निष्पादन एक माह के भीतर अनिवार्य रूप से पूरा करने को कहा गया। इसके अतिरिक्त सभी अंचलाधिकारी अपने-अपने अंचल के लिए आगामी तीन माह की कार्ययोजना तैयार कर जिलाधिकारी को सौंपेंगे। भू-अर्जन मामलों की समीक्षा के दौरान रैयतों से आवेदन प्राप्त करने के लिए शिविर आयोजित करने और जांच के बाद पात्र लाभुकों को शीघ्र भुगतान सुनिश्चित करने का निर्देश भी दिया गया। बैठक के अंत में प्रधान सचिव ने अधिकारियों से कहा कि जनता से जुड़े राजस्व कार्यों में लापरवाही किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी और तय समय-सीमा में परिणाम दिखना चाहिए।





























































































