बक्सर खबर (माउथ मीडिया) । लंबे अंतराल के बाद बतकुच्चन गुरु के दर्शन हुए। वह सड़क के किनारे खड़े हो कुछ लोगों से बात कर रहे थे। मैंने सोचा राम सलाम किया जाए। लेकिन, वे अपनी रौ में थे, सो टोका नहीं, क्योंकि उनकी बातें बड़ी पते की होती हैं। जो शब्द कान से टकराए वे चौकाने वाले थे। वे बोल रहे थे, यहां काम करना आसान नहीं है। नेता सक्रिय हो तो विरोधी हल्ला मचाते हैं। इतना ही नहीं अगर ज्यादा सोशल हुए तो पैरवी इतनी आती है कि नेता परेशान हो जाते हैं। सुने में आया रहा कि यहां एगो सिंघ वाले विधायक हैं। लोगन बदे कवनो अफसर के फोन मिला देवे हैं। एके छोड़ो, उका परेशान नहीं करो। उ मनई इतना सिंघ कर रहा है कि, पूछ विभाग का फजिहत हो गवा है।
परेशानी से बचे बदे सब फोन से दूरी बढ़ावे लगा है। उनके बात सुन वहां खड़े लोग हंसने लगे। कुछ तो उनसे पूछ बैठे, अब बता भी दिजीए यह सिंघ वाले हैं कौन। लेकिन, शायद सुनने वालों को यह पता नहीं था। बतकुच्चन गुरु टोका-टोकी पसंद नहीं करते। वे हंसने लगे और सवालों का जवाब तलाशने का इशारा करते चलते बने। मैंने भी उनको जाते देखता रहा और कुछ टोका नहीं। क्योंकि सिंघ वाला सवाल और पूछ वाला विभाग दोनों मेरे जेहन में कौंध रहा था। (माउथ मीडिया : यह बक्सर खबर का साप्ताहिक व्यंग कालम है। जो प्रत्येक शुक्रवार को प्रकाशित होता है। इसमें हम उन विषयों को रखते हैं जो लोगों के मध्य चर्चा आम होती है।)































































































