मझरिया अग्निकांड: मदद के लिए सबसे पहले पहुंची विश्वामित्र सेना, बांटे बिस्तर और कंबल

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पीड़ितों से वीडियो कॉल पर बोले राजकुमार चौबे- संकट की घड़ी में हम आपके साथ                                     बक्सर खबर। सदर प्रखंड के मझरिया गांव में हुए भीषण अग्निकांड ने कई परिवारों की खुशियों को राख में बदल दिया। शुक्रवार की रात शॉर्ट सर्किट से लगी आग ने पांच परिवारों के आशियाने छीन लिए। आग की भयावह लपटों में घर-गृहस्थी का सारा सामान, नगद राशि जलकर खाक हो गई, एक मवेशी की मौत हो गई जबकि पांच मवेशी झुलस गए। इस दर्दनाक हादसे में किसान शिवजी यादव गंभीर रूप से झुलस गए, जिनका इलाज शहर के गोलंबर स्थित विश्वामित्र अस्पताल में चल रहा है। अग्निकांड की सूचना मिलते ही शनिवार को विश्वामित्र सेना के सदस्य पीड़ित परिवारों की मदद के लिए घटनास्थल पर पहुंचे। सेना के सदस्यों ने मौके पर ही पीड़ित परिवारों की राष्ट्रीय अध्यक्ष राजकुमार चौबे से वीडियो कॉलिंग के माध्यम से बात कराई और पूरी घटना की जानकारी दी। राष्ट्रीय संयोजक श्री चौबे ने पीड़ितों से संवाद करते हुए उन्हें ढांढस बंधाया और भरोसा दिलाया कि इस आपदा की घड़ी में विश्वामित्र सेना हर संभव सहायता के लिए मजबूती से उनके साथ खड़ी है। उन्होंने कहा कि जल्द ही संगठन के सदस्य अस्पताल पहुंचकर झुलसे पीड़ित की मदद करेंगे और आगे भी हर स्तर पर सहयोग दिया जाएगा।

विश्वामित्र सेना के संस्थापक सदस्य गोवर्धन चौबे, बिनोद सिंह और बबलू सिंह के नेतृत्व में पीड़ित परिवारों के आश्रितों के बीच सोने के बिस्तर, कंबल सहित अन्य आवश्यक सामग्री का वितरण किया गया, ताकि इस सर्द और कठिन समय में उन्हें कुछ राहत मिल सके। स्थानीय ग्रामीणों ने इस दुखद घड़ी में सबसे पहले आगे बढ़कर मदद करने पर विश्वामित्र सेना के कार्यकर्ताओं की भूरी-भूरी प्रशंसा की। लोगों का कहना है कि जब सब कुछ जलकर राख हो गया, तब विश्वामित्र सेना पीड़ितों के लिए उम्मीद की किरण बनकर सामने आई।

गौरतलब है कि गैर-राजनीतिक संस्था विश्वामित्र सेना, जिले के प्रतिष्ठित समाजसेवी राजकुमार चौबे द्वारा सनातन संस्कृति और धरोहरों की रक्षा के उद्देश्य से स्थापित की गई है। संस्था पिछले कई वर्षों से जरूरतमंदों के बीच राहत सामग्री वितरण, दर्जनों सेवा बस्तियों में नि:शुल्क शिक्षा केंद्र संचालन और सामाजिक जागरूकता के कार्यों में सक्रिय भूमिका निभा रही है। मझरिया अग्निकांड के पीड़ित परिवारों के साथ विश्वामित्र सेना का सबसे पहले खड़ा होना न केवल मानवीय संवेदना की मिसाल है, बल्कि समाज को यह संदेश भी देता है कि संकट की घड़ी में सेवा और सहयोग ही सबसे बड़ा धर्म है।

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