श्रीराम कथा में बाल लीलाओं, अहिल्या उद्धार और भगवान शंकर की भक्ति का किया अद्वितीय वर्णन बक्सर खबर। रामरेखा घाट स्थित रामेश्वर नाथ मंदिर में चल रही श्रीराम कथा के चौथे दिन कथा व्यास स्वामी प्रेमाचार्य पीताम्बर जी महाराज ने अपने भावविभोर कर देने वाले प्रवचन में कहा कि “जीवन में यदि कोई एक साधना सर्वोत्तम है तो वह है श्रीराम का नाम जप और निष्काम भक्ति।” स्वामी जी ने भगवान श्रीराम की बाल लीलाओं से लेकर अहिल्या उद्धार तक के दिव्य प्रसंगों का वर्णन करते हुए कहा कि “राम नाम की महिमा अपरंपार है, इसे जपते-जपते ही जीवन सार्थक हो जाता है।”
प्रवचन के दौरान उन्होंने तुलसीदास कृत रामचरितमानस की पंक्तियां दोहराईं “ठुमकि चलति रामचंद्र बाजति पैजनियां…” और बताया कि जब अयोध्या में राम जन्मे, तो नगर आनंद-उल्लास से गूंज उठा। देवताओं से लेकर भोलेनाथ तक प्रभु के दर्शन के लिए उमड़ पड़े। भगवान शंकर की भक्ति का अद्वितीय रूप तब देखने को मिला जब वे विविध वेश में अयोध्या की गलियों में घूमते रहे कभी गायक बनकर, कभी भिक्षुक बनकर। अहिल्या उद्धार के प्रसंग को विस्तार से बताते हुए स्वामी पीताम्बर जी ने कहा कि जिस अहिल्या को गौतम ऋषि के श्राप से पत्थर होना पड़ा, वह भी प्रभु श्रीराम के चरण स्पर्श मात्र से पुनः जीवन प्राप्त कर गईं। यह घटना श्रीराम की करुणा और दिव्यता का प्रमाण है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि भगवान राम केवल धर्म के रक्षक नहीं, बल्कि करुणा के साकार रूप भी हैं, जो पीड़ित आत्माओं को मुक्ति प्रदान करते हैं।

श्रीराम के आदर्शों में छुपा है मानव कल्याण का मार्ग
प्रवचन के अंत में उन्होंने कहा कि जो सच्चे मन से भगवान राम का नाम जपते हैं, उनके जीवन से सारे संकट दूर हो जाते हैं। भक्ति में लीन व्यक्ति हमेशा धर्म का कार्य करता है, और ऐसे भक्तों पर प्रभु की कृपा सदैव बनी रहती है। स्वामी जी के अनुसार श्रीराम के जीवन आदर्श आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं और यदि मनुष्य उन्हें अपनाता है, तो उसका जीवन कल्याणकारी हो सकता है। स्वामी जी के प्रवचन के दौरान श्रोतागण मंत्रमुग्ध होकर कथा का रसपान करते रहे। बाल लीलाओं की मधुर छवियां और अहिल्या उद्धार का करुणामयी वर्णन श्रोताओं की आंखें नम कर गया।