बक्सर खबर। सृष्टि, मानव कल्याण व धर्म की रक्षा के लिए भगवान का अवतार धरा-धाम पर होता रहा है। इनमें 24 अवतार ऐसे हैं। जिसका वर्णन शास्त्रों में हुआ है। इन 24 में से 10 अवतार भगवान के ऐसे हैं। जिसे बहुत से लोग जानते हैं। इन 10 में 2 अवतार ऐसे हैं। जो जनमानस के जेहन में विद्यमान हैं। लेकिन, इनमें से एक अवतार जिसे आप और हम कृष्ण अवतार के नाम से जानते हैं। वह करुणा, दया, प्रेम का अवतार है। धराधाम पर आने के साथ ही भगवान ने जगत के कल्याण के लिए वह सारे काम किए हैं। जिससे उनके भक्तों का कल्याण हो। माखन चोरी, गोपियों को छेडऩा, दूष्टों का अंत, महाभारत युद्ध में शांति का संदेश का वर्णन हम सभी जानते हैं।

अनेक लोग उनके उपर लांछन लगाते हैं। भगवान ने ऐसा किया, वैसा किया, लेकिन, उन्होंने जो भी किया। अपने भक्तों के प्रेम में किया। जिन कथाओं में इन प्रसंगों का उल्लेख आता है। वहीं ऐसा करने का कारण भी बताया गया है। लेकिन, लोग उन बातों पर ध्यान नहीं देते। भगवान ने रामावतार में धर्म और मर्यादा के पालन के लिए स्वयं अनेक कष्ट सहे। लेकिन, भक्तों के लिए उन्होंने कृष्णा अवतार में अनेक कष्ट उठाए। इसी लिए उनका यह अवतार करुणा सागर के रुप में जाना जाता है। उन्होंने अपनी लीला के माध्यम से सिर्फ व सिर्फ प्रेम और शांति का संदेश दिया है। इन कारणों से यह अवतार श्रेष्ठ अवतार है। यह उपदेश पूज्य संत जीयर स्वामी जी महाराज ने इंदौर में हो रहे चातुर्मास व्रत के दौरान दिए।