यूरिया के लिए भटक रहे किसानों को लूट रहे दुकानदार

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‌‌‌बक्सर खबर। सच में किसानों का कोई माई बाप नहीं है। सारी सियासत उनके नाम पर होती है लेकिन उनकी बदहाली के बारे में न तो सरकारें चिंतित हैं न ही प्रशासन। बिगत दिनों जिलाधिकारी ने अधीनस्थों की बैठक कर जिले में किसानों के बीच यूरिया की किल्लत नहीं होने देने के निर्देश दिए थे, लेकिन हालत यह कि गेहूं की सिचाई करने के बाद इन दिनों किसान यूरिया के लिए भटक रहे हैं। न सिर्फ भटक रहे हैं बल्कि लूटे भी जा रहे हैं।

यह लूट प्रशासन की आंखों के सामने हो रही है, लेकिन लग तो ऐसा रहा कि प्रशासन अंधा हो चुका है। इस हालात का फायदा उठा रहे हैं खाद-बीज वाले खुदरा दुकानदार। वे किसानों को ब्लैक में यूरिया मुहैया करा रहे हैं। और तो और विक्री की रसीद भी नहीं दे रहे।
इन दिनों किसान दिनरात गेंहू वाले खेतों की सिंचाई में जुटे हैं। बुआई के बाद बीस- से पच्चीस दिन के भीतर पहली सिंचाई देनी होती है। इसके बाद खेतों में यूरिया का छिड़काव किया जाता है ताकि फसल की बढ़ोतरी हो सके। जिन किसानों ने खेतों की सिंचाई कर ली है वे यूरिया के लिए भटक रहे हैं। चूंकि सिंचाई के तुरंत बाद ही यूरिया का छिड़काव किया जाता है ऐसे में वे सस्ता-महंगा के चक्कर में पड़ने के बजाय वे तय मूल्य से ज्यादा कीमत देकर यूरिया उठा रहे हैं। जिले के राजपुर प्रखंड के तीन लकड़ा में इफको का सेंटर है। यही नहीं तियरा, राजपुर, भलुहां, चौसा तक में खाद की खुदरा दुकानें हैं। किसान जब इफको सेंटर पहुंच रहे हैं तो वहां उन्हें खाद नहीं मिल पा रहा। मिल भी रहा तो उसके लिए काफी कवायद करनी पड़ रही। एक आधार कार्ड पर तीन बोरी यूरिया कुछ-कुछ किसानों को दी जा रही। यहां नौबत मारपीट की आ जा रही। किसानों का आरोप है कि सेंटर से यूरिया की कालाबाजारी की जा रही। किसानों को पर्याप्त मा़त्रा में यूरिया नहीं दी जा रही। हर बार रैक आने की बात कही जा रही। जबकि खुदरा दुकानों पर खाद मिल रही। किसानों का कहना है कि सेंटर पर कुछ लोग बड़ी मात्रा में यूरिया का उठान कर रहे हैं और किसानों को मौके पर ही ब्लैक में बेच रहे हैं। किसानों से प्रति बोरी सौ से ज्यादा रुपये अतिरिक्त वसूले जा रहे। यही हाल खाद की खुदरा दुकानों का है। दुकानदारों को मानक के अनुसार बिक्री की रसीद देनी होती लेकिन वे रसीद मांगने वाले किसानों को भगा दे रहे। कारण यह कि वे प्रति बोरी सौ से ज्यादा रुपये वसूल रहे। ऐसे में बेचारे किसान करें तो क्या करें। इस संबंध में पूछे जाने पर सदर एसडीओ केके उपाध्याय ने कहा कि जिला प्रशासन की ओर से यूरिया की किल्लत नहीं होने देने के निर्देश पहले ही दिए जा चुके हैं। इसके बावजूद ऐसा हो रहा तो इसकी जिम्मेदारी प्रखंड कृषि पदाधिकारी और जिला कृषि पदाधिकारी की है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि किसान तय कीमत से ज्यादा कीमत वसूलने का सबूत देंगे तो वह खुद कार्रवाई करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि किसान गड़बड़ियों की शिकायत उनके मोबाइल नंबर 9473191241 पर दे सकते हैं।