न यादव हारे न मुसलमान, हारे तो पंडित और यजमान

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बक्सर खबर।माउथ मीडिया : आदर्श आचार संहिता समाप्त हो गई है। दुनिया अपनी रफ्तार में चलने लगी है। पुलिस हो या अपराधी सब अपने काम पर लौट आए हैं। इसकी खबरें आने लगी हैं। इस भीड़ में लंबे समय से एक व्यक्ति से मुलाकात नहीं हो रही थी। आज अचानक वे मिले। मैंने उनको देखा तो पास पहुंच गया। देखते ही कहा जय राम जी की। वे हंस कर बोले का हाल हौ गुरू। मैंने उनसे पूछा चुनाव में आप कहां चले गए थे। बतकुच्चन गुरू हंसने लगे। उन्होंने कहा हम तो यहीं थे। लोगन से मिलना-जुलना कम दिए रहे। मैंने पूछा क्यूं? उनका जवाब उतना ही लाजवाब था। मैं ठहरा मनमौजी आदमी। जो मन में आए बोल दिए रहे। लेकिन, ससुरा इ दुनिया बहुत सयानी हो गवा रही। हर बात का मतलब राजनीति से जोड़ के लगावे है।

एही बदे हम किनारे हो गए रहे। कोई पक्ष समझता कोई विपक्ष। सो हम तय किए रहे। अब ससुर चुनाव बादे बोलेंगे। अब चुनाव को ही ले लिजिए। सब मनई अलग-अलग अर्थ लगावे हैं। कवनो मनई कहाता है जाति हारी है, कवनो कहता है विकास नहीं राष्ट्रवाद का क्षद्म रुप जीता है। लेकिन, साहेब हम कहते हैं यादव हारे न मुसलमान। हारे तो पंडित और उनका झोला लेकर चलने वाले यजमान। मैं उनकी बात सुन कर थोड़ा चकराया। लेकिन, चुप ही रहा। वे बोले जा रहे थे। अब देखा ए बिहार मा भाजपा के तीन, जदयू के दो कुल पांच यादव, जदयू के लोजपा और कांग्रेस से तीन मुसलमान जीते हैं। अर्थात बिहार की चालीस में से आठ सिट पर वे चुनाव जीत गए हैं। अर्थात कुल सीटों के बीस प्रतिशत। ऐसे में कोई मिला दावा कर सकत हैं का यादव हारे या मुसलमान।

add सप्ताहिक कालम यह भी जाने के प्रायोजक

अरे हारे तो इन जातियों के नाम पर राजनीति करने वाले राजनीतिक पंडित। अर्थात राजद के यादव हार गए। भाजपा और जदयू के यादव जीत गए। जो जाति की खेती करते हैं। उनकी हवा निकल गई। जो जाति को छोड़ जमात के साथ थे वे जीत गए। इस लिए हम कहते हैं जाति की राजनीति से ज्यादा जरुरी है जमात की राजनीति करो। देश और समाज की बात करो। बतकुच्चन गुरु की बातें और उनका गणित सुनकर मैं दंग था। लेकिन, राजनीति की ज्यादा समझ नहीं होने के कारण चुप ही रहा। मुझे तो इस बात की खुशी थी। चलो अब बतकुच्चन गुरू से मुलाकात होगी। कुछ अच्छी, कुछ मजेदार बातें सुनने को मिलेंगी। यह सोच मैंने उनसे विदा लिया और अपने कार्यालय की तरफ लौट आया।( नोट- माउथ मीडिया का यह साप्ताहिक कालम, शुक्रवार को प्रकाशित होता है। लेकिन, चुनाव कारणों और आदर्श आचार संहिता के कारण यह काल पूरे चुनाव तक बंद रहा। आगे से आप इसे शुक्रवार को पढ़ सकेंगे।)