हवन करते याज्ञिक पंडित व यजमान

बक्सर खबर। अध्यात्म की उर्जा के आगे सारी शक्तियां कमजोर हैं। परमात्मा की आराधाना के कई माध्यम हैं। आराधना, उपासना, जप-तप, योग, साधाना, भक्ति, दान, पुण्य, सेवा यह सभी विधाएं परमात्मा को पाने का माध्यम हैं। यह सबकुछ इन दिनों एक जगह देखने को मिल रहा है। अपने जिले के ईटाढ़ी प्रखंड अंतर्ग काशीमपुर-इंदौर गांव में। यहां पिछले चार माह से पूज्य जीयर स्वामी जी का चातुर्मास व्रत चल रहा है।

जिसका समापन इस माह की चौबीस तारीख को होना है। चार माह के इस कठिन व्रत के अंत में लक्ष्मीनारायण महायज्ञ होता है। जो 19 तारीख से यहां चल रहा है। सिर्फ दो दिन शेष रह गए हैं। लोगों का सैलाब यज्ञ में शामिल होने के लिए उमड़ रहा है। इसे देखकर जान पड़ता है। एक तरफ भगवान की कृपा बरस रही है दूसरी तरफ ज्ञान। जिसमें श्रद्धालु गोते लगा रहे हैं।

जीयर स्वामी जी संग मंचासीन महात्मा व जगत गुरु

ज्योतिष, कर्मकांड, योग व उपदेश की पन्द्रह घंटे चल रही है पाठशाला
बक्सर खबर। चातुर्मास यज्ञ के दौरान सबसे लंबा खंड ज्ञान और उपदेश का है। सुबह साढ़े छह बजे पूज्य जीयर स्वामी जी भगवान की आरती करते हैं। भगवान की प्रार्थना के साथ यह पाठशाला प्रारंभ होती है। पहली घंटी में योग गुरू योगेश जी लोगों को योग सीखाते हैं। पंडित शंभू नाथ शास्त्री ज्योतिष का ज्ञान देते हैं। इसी तरह मानस, रामायण, वाल्मीकि रामायण, भागवत, गीता, सबके उपदेश होते हैं। कोई संस्कृत में कोई, हिंदी तो कोई भोजपुरी। अध्यात्म और भक्ति मार्ग से जुड़ी इस पाठशाला में वैदिक शास्त्रों से जुड़े ज्ञान की वर्षा यहां प्रति दिन पंन्द्रह घंटे हो रही है।

उपदेश व प्रवचन सुनते लोग

दूसरी तरफ बरस रही है भगवान की कृपा
बक्सर खबर। प्रवचन पंडाल के ठिक सामने बनी है विशाल यज्ञशाला। जिसमें 125 हवन कुंड बने हैं। यहां सवा सौ याज्ञिक पंडित और इससे दुगनी संख्या में यजमान। मंत्र के उच्चारण के साथ स्वाहा की ध्वनि जब यहां गुंजती हैं तो ऐसा लगता है प्रभु की कृपा सीधे बरस रही है। इसके अलावा अन्य शिविर पंडालों में वेद, उपनिषद, गीता, पुराण आदि के स स्वर पाठ से वातावरण गुंजायमान हो रहा है। एक तरफ भगवान का अभिषेक व पूरे यज्ञ स्थल के चारो तरफ चल रहे अखंड हरी कीर्तन का सिलसिला जारी है। यह भगवान की कृपा ही है। इंदौर व काशिमपुर के मध्यम जिस भूमि पर कभी दो लोग एक साथ बैठते नहीं थे। वहां प्रतिदिन एक लाख लोग प्रभु का प्रसाद ग्रहण कर रहे हैं।

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