बक्सर खबर : पंचकोश मेले का दूसरा पड़ाव गुरुवार को नदांव में लगा। वहां श्रद्धालुओं ने भगवान नर्वदेश्वर महादेव की पूजा- अर्चना की। कभी यहां त्रेता युग में भगवान नारद का आश्रम हुआ करता था। ऐसी धार्मिक मान्यता है। उनके द्वारा स्थापित भगवान शिव के मंदिर को नर्वदेश्वर महादेव कहा जाता है। पंचकोश मेले के दूसरे दिन जब यहां श्रद्धालु पहुंचते हैं तो खिचड़ी का प्रसाद बनाकर खाया और खिलाया जाता है।

खिच्‍डी का प्रसाद बनाती महिलाएं

यहां एक सवोवर भी है। जिसका नाम नारद सरोवर है। श्रद्धालु इसकी परिक्रमा भी करते हैं। पंचकोशी समिति के सदस्यों ने इस परंपरा का निर्वहन करते हुए सरोवर की परिक्रमा की। जिसमें बसांव मठ के महंत अच्युत प्रपन्न चार्य जी महाराज एवं रामनाथ ओझा जी आदि ने हिस्सा लिया। नदांव गांव शहर के गोलंबर से लगे जासो रोड में स्थित है। जब यहां पंचकोश मेला लगता है तो स्थानीय लोग श्रद्धालुओं की सेवा के लिए आगे आते हैं।

नारद सरोवर भ्रमण करते पंचकोशी समिति के सदस्य

कई स्वयं सेवी संस्थाएं अपने तरफ से शिविर लगाती हैं। कहीं चिकित्सा तो कहीं सहायता केन्द्र सबकुछ स्थानीय लोगों के प्रयास यहां चलता है। अब तीसरा पड़ाव शुक्रवार को सदर प्रखंड के भभुअर गांव में लगेगा। जहां भार्गव मुनी का आश्रम हुआ करता था। यहां नारायण सरोवर स्थित है। यहीं पर श्रद्धालु चुड़ा दही का प्रसाद ग्रहण करते हैं।