सफरनामा : 2017 में हमने क्या खोया

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बक्सर खबर : वर्ष 20017 अवसान की तरफ बढ़ रहा है। अगर पूरे वर्ष का आकलन करें तो हमने पाया कुछ नहीं खोया ज्यादा है। अपना जिला इस वर्ष छोटी-बड़ी घटनाओं को लेकर चर्चा में रहा। वर्ष के प्रारंभ से लेकर अंत तक। इस बात की चर्चा होती रही। हमारे हाथ इस वर्ष क्या लगा और क्या खोया। इस क्रम में सबसे बड़ी घटना रही जिलाधिकारी मुकेश पांडेय की मौत। दस अगस्त वे इस दुनिया से चले गए। उनके जाने के महज कुछ बाद अपर समाहर्ता स्तर के अधिकारी तौकीर अकरम ने जीवन लीला समाप्त कर ली। इन हादसों ने सोचने पर मजबूर कर दिया। पूरे वर्ष पर नजर डाली गई तो चौंकाने वाले आंकड़े हाथ लगे। इस वर्ष ग्यारह लोगों की मौत सामने आई। जो फांसी के फंदे पर लटक गए।

इससे कहीं ज्यादा ने मौत की छलांग लगा दी। किसी ने गंगा सेतु को चूना तो किसी ने ट्रेन की पटरी को। अगर औसत की बात करें तो हर महीने दो लोगों ने मौत को चुना। इनमें सर्वाधिक संख्या युवतियों और महिलाओं की रही। या कहीं न कहीं वे अन्य मौतों में भी कारण रहीं। मौत के इस खेल में जेल भी अछूता नहीं रहा। वहां भी एक कैदी ने फांसी लगा जीवन लीला समाप्त कर ली। मौत के बाद कहा गया। सजा याफ्ता बंदी की पत्नी ने दूसरी शादी कर ली। जिसके गम में उसने फांसी लगा ली। मौत के इस खेल में यह आंकड़े सिर्फ उन लोगों के हैं। खुद अपनी जिंदगी से मुंह मोड़ लिया। इनसे कहीं ज्यादा लोगों की इस वर्ष में हत्या कर दी गई। एक नजर हम डालेंगे। हत्या के आंकड़ों पर शनिवार की सुबह।

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