यह भी जाने: गौरीशंकर मंदिर, जहां शिव ने लिया था अद्र्धनारिश्वर रुप

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बक्सर खबर। सिद्धाश्रम आध्यात्मिक नगरी है। यह बात सभी जानते हैं। इसका जिक्र जगह-जगह होता है। लेकिन, ऐसा किस आधार पर कहा जाता है। यह जानना हम सभी के लिए जरुरी है। वर्तमान बक्सर में अभी भी अनेक ऐसे मंदिर व स्थान हैं। जो आध्यात्मिक विरासत को अपने में समेटे हुए हैं। इनमे से ही एक है गौरीशंकर मंदिर। जो नगर के सोहनी पट्टी इलाके में विद्यमान है। इसका वर्णन ब्रह्मांड पुराण में वर्णित है। इसी मंदिर के प्रांगण में पार्वती ने शिव को पाने के लिए कठोर तपस्या की थी। जिसके कारण शिव को उनके आगे नतमस्तक होना पड़ा। भक्त वत्सल्य शिव, माता पार्वती के सम्मुख प्रकट होकर उन्हें अपना अद्र्धागिनी बनाये और गौरीशंकर का अस्तित्व हमारे समक्ष हुआ। मंदिर में स्थित शिव लिंग को देखने से स्पष्ट होता है कि उक्त शिवलिंग भगवान शिव एवं माता पार्वती के अद्र्धनारीश्वर रुप का व्याख्यान कर देता है। मां गौरी जो प्राकृतिक रुप में हैं और जगत पिता भगवान शंकर जो पुरूष रुप में हैं। दोनों विभूतियों का एकाकार हुआ है। उस अद्वितीय क्षण का साक्षी बना बक्सर का गौरीशंकर मंदिर।

मंदिर के सरोवर की भी है महता
बक्सर खबर। मंदिर के परिसर में सरोवर स्थित है। जिसका धार्मिक महत्व काफी महत्वपूर्ण है। भादो के अमावस्या के दिन उक्त सरोवर में स्नान करने से सारे कष्ट दूर हो जाते हैं। विदित हो कि यहीं तपस्या के दौरान जब पार्वती ने एक भी पत्ता नहीं खाने का प्रण लिया। जिसके कारण पार्वती का नाम अर्पणा यहीं पड़ा। तब यहां सरोवर हुआ करता था मंदिर नहीं। वर्तमान समय में यह मंदिर नगर के सोहनी पट्टी मुहल्ले में स्थित है। इस परिसर में साफ-सफाई न होने के कारण तालाब का अस्तित्व मिटने के कगार पर है। पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए बार-बार इस मंदिर का नाम चिह्नित होता है। लेकिन, विकास तो दूर अब मंदिर की जमीन पर विद्यालय भवन का निर्माण हो गया है। मुख्य गेट और मंदिर को छोड़ शेष जगह विद्यालय के भवन बन गए हैं। तालाब में मुहल्ले का पानी बहता है। हालाकि पूर्व सांसद लालमुनी चौबे के प्रयास से यहां कुछ काम हुआ। तालाब के आस-पास नाली बनी। जिससे मुहल्ले का पानी बाहर निकल सके। इस वजह से अस्तित्व थोड़ा बचा है। लेकिन, मुहल्ले के लोगों द्वारा लगातार अतिक्रमण किए जाने की वजह से यह धीरे-धीरे सिमटता जा रहा है।

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