प्रोफेसर अजीत सिंह

बक्सर खबर। विश्वामित्र की तपो भूमि। यह शब्द लोग अक्सर बक्सर के लिए प्रयोग करते हैं। ऐसा बोलने वाले अथवा पढऩे वाले जानते होंगे। यह भूमि शिक्षा भूमि रही है। यहां भगवान को भी शिक्षा मिली है। इस पवित्र भूमि ने अनेक ओजस्वी संतानों को जन्म दिया है। जो शिक्षा के क्षेत्र में अलख जगा रहे हैं। आज अपने साप्ताहिक कालम इनसे मिलिए में हम आपका परिचय ऐसे शख्स से करवा रहे हैं। जिन्होंने कम्प्यूटर शिक्षा के क्षेत्र में मिसाल कायम की है। पिछले बीस वर्षों से पटना विश्व विद्यालय के अंतर्गत छात्रों को शिक्षा दे रहे हैं। जिसके लिए इस वर्ष सरकार ने उन्हें शिक्षक दिवस पर सम्मानित भी किया। बक्सर के रहने वाले अजीत सिंह फिलहाल पटना वीमेंस कालेज में प्रोफेसर हैं। प्रस्तुत है उनसे बातचीत के मुख्य अंश :-

शिक्षक दिवस पर सम्मानित होते अजीत सिंह

सहज शब्दों में लिखी हैं कम्प्यूटर साइंस की 12 किताबें
बक्सर खबर। सफल शिक्षक वही है जो सरल शब्दों में सहज तरीके से अपने छात्रों को विषय के बारे में बता सके। इसको ध्यान में रखते हुए उन्होंने सहज शब्दों से परिपूर्ण 12 किताबें लिखी हैं। अपने शिक्षा अध्ययन के दौरान उन्होंने महसूस किया कि विदेशी लेखकों की किताबें जटिल हैं और महंगी भी। जिससे छात्रों को पढऩे और खरीदने में परेशानी होती है। यह बात जब उनके जेहन में आई तो उन्होंने स्वयं लिखना शुरू किया। अब तक बारह किताबें लिख चुके हैं। जो अमेजन साइट पर भी उपलब्ध हैं। सी प्लस प्लस, आपरेटिंग सिस्टम, डाटा बेस मैनेजमेंट, डाटा सिक्योरिटी, क्लाउड कम्प्यूटिंग आदि उनकी प्रमुख किताबें हैं।

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बक्सर के हैं निवासी
बक्सर खबर। अजीत सिंह अपने जिले के सदर प्रखंड अंतर्गत रामोबरिया गांव के निवासी हैं। उनके पिता सीताराम सिंह अब नहीं रहे। बक्सर खबर ने जब उनसे संपर्क किया तो अपने जिले का नाम सुनते ही बड़े ही सहज तरीके से बात करने लगे। उनका जन्म 14 दिसम्बर 1976 को हुआ और वे पढ़ाई के लिए पटना में ही रह गए। मगध विश्व विद्यालय से स्नातक और फिर कम्प्यूटर साइंस में एमफील तक की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने कहा आज हमारे द्वारा पढ़ाए गए अनेक छात्र बेहतर मुकाम पर हैं। उनकी सफलता देख अच्छा लगता है। एक शिक्षक के लिए इससे बड़ा संतोष और क्या हो सकता है।