बक्सर खबर। चौसा के रहने वाले ब्रिजेश सिंह उर्फ पिंटू पहलवान को आज पूरा देश जानता है। उनकी वजह से आज बिहार और बक्सर का नाम पूरे देश में रौशन हुआ है। ब्रिजेश ने कुश्ती चैंपियनशिप का फाइनल जीत गोल्ड मेडल अपने नाम किया है। उन्होंने बताया बीएसएफ द्वारा गुजरात के गांधीनगर में आयोजित आल इंडिया फ्रंटियर कुश्ती चैंपियनशिप 2018 का आयोजन हुआ था। जो 27 अगस्त से 31 अगस्त तक चलने वाली प्रतियोगिता में बीएसएफ के त्रिपुरा, नार्थ बंगाल, काश्मीर, राजस्थान, हरियाणा के सैकड़ों रेसलर जवानों ने हिस्सा लिया। सुपर हेवीवेट 97+ किलो भार की श्रेणी में गोल्ड के लिए हुए रोमन स्टाईल कुश्ती का फाइनल मुकाबला ब्रिजेश और राजस्थान के पहलवान के बीच हुआ। जिसे शिकस्त दे पिंटू पहलवान ने गोल्ड मेडल हासिल कर बिहार का नाम रौशन किया। वे चौसा प्रखंड के सोनपा गांव के निवासी हैं। जिनकी तैनाती फिलहाल राजस्थान के गंगानगर 18वीं बीएसएफ में कांस्टेबल के पद पर है।

जूडो चैंपियनशिप 2018 के दोनों इवेंट में जीत चुका है गोल्ड
बक्सर खबर। इससे पूर्व अप्रैल माह में बीएसएफ द्वारा आयोजित राजस्थान फ्रंटियर रेसलिंग एण्ड जूडो चैंपियनशिप 2018 में भी पिंटू ने दो गोल्ड मेडल प्राप्त किया था। चैंपियनशिप 2018 जो 10 से 11 अप्रैल तक चला था जिसमें राजस्थान के सारे बीएसएफ वाहिनियों के जवानों ने हिस्सा लिया था। उक्त दो दिवसीय चैंपियनशिप में पार्टिसिपेट किए करीब 100 जवानों को पछाड़ते हुए फ्री स्टाईल रेसलिंग और जूडो में ब्रिजेश सिंह उर्फ पिंटू पहलवान ने प्रथम स्थान प्राप्त करते हुए दोनों इवेंट्स में गोल्ड मेडल प्राप्त किया था । 
आल इंडिया बीएसएफ जूडो चैंपियनशिप 2017 में जीत चुका है सिल्वर
बक्सर खबर। जूडो व पहलवानी में महारत हासिल कर सोनपा के पिंटू ने इसके पहले भी बीएसएफ के लिए कई मेडल जीत चुका है। राजस्थान के जोधपुर एसटीसी के द्वारा आयोजित आल इंडिया बीएसएफ जूडो प्रतियोगिता 2017 जो 03 अक्टूबर से 06 अक्टूबर तक चला था। जिसमें पिंटू पहलवान ने सुपर हैवी वेट(98)किलोग्राम भार में सिल्वर मेडल हासिल किया था। और उससे पहले 2017 अप्रैल माह में हुए इंटर सेक्टर जुडो प्रतियोगिता में उसने गोल्ड हासिल किया। तब उनका चयन आल इंडिया के लिए हुआ था।
2013 में मिला था बिहार केशरी का सम्मान
बक्सर खबर। चौसा प्रखंड के सोनपा गांव निवासी सेवा निवृत फौजी श्रीनिवास सिंह के पुत्र ब्रिजेश सिंह उर्फ पिंटू पहलवान के बारे में स्थानीय लोगों का कहना है कि बचपन से ही उसे एथलीट में काफी रूचि थी। उसी लगन से आज बीएसएफ में है और खेल में अपना लोहा मनवा रहा है।