निर्भया को इंसाफ दिलाने में बक्सर की अहम भूमिका, यहीं गंगा में विसर्जित हुई थी अस्थियां

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आज मिली होगी उसकी आत्मा को शांति
बक्सर खबर। देश में जब किसी दोषी को फांसी दी जाती है। बक्सर का जिक्र जरुर आता है। लेकिन, निर्भया के मामले में बक्सर से दो काहानिया जुड़ीं है। निर्भया के हत्या रोपियों को आज फांसी दी गई। पूरे देश की नजर इस पर थी। जिन चारों को आज तड़के सुबह फंदे पर लटकाया गया। उनके लिए भी फंदे बक्सर केन्द्रीय कारा से दिल्ली के तिहाड़ जेल भेजे गए थे। उन्हें जनवरी मांह में यहां से भेजा गया था। इसकी तस्दीक आज जेल अधीक्षक विजय अरोड़ा ने की। 16 दिसम्बर 2012 की रात निर्भया के साथ यह घटना हुई थी। मृत्यु के उपरांत उसकी स्थियां लेकर पिता ब्रदीनाथ बक्सर आए थे। क्योंकि उनका गांव मेडौला कला बक्सर की सीमा से लगे उत्तर प्रदेश के बलिया जिला में आता है। 1 जनवरी 2013 को अपने पुत्र व अन्य लोगों के साथ बोट द्वारा गंगा के मध्य गए। अस्थियों को गंगा में विसर्जित किया गया।

इस वाकये को गुजरे सात वर्ष तीन माह हो चुके हैं। यह तस्वीर उस पिता की दर्द की कहानी है। जो अपने ही जीवन में बेटी की अस्थियां लेकर गांव लौटा। हालांकि वे इस दौरान अकेले नहीं थे। उत्तर प्रदेश के कई नेता व गांव के लोग साथ आए थे। उस समय पूरा देश निर्भया को इंसाफ दिलाने के लिए उठ खड़ा हुआ था। जो दरिंदगी उसके साथ हुई थी। उसे कोई नहीं भूल सकता। ऐसा करने वाले छह आरोपी थे। जिनमें से एक ने जेल में आत्महत्या कर ली। एक नाबालिग होने के कारण छूट गया। लेकिन, निर्भया का ही वह मामला है। जिसने कानून में संशोधन के लिए सरकार को विवश किया। भविष्य में जब भी दुष्कर्मियों को फांसी देने की चर्चा होगी। तो बक्सर का नाम जरुर लिया जाएगा।

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