बक्सर खबर। सिमरी प्रखंड के बड़का सिघनपुरा गांव की बेटी ने मुम्बई फिल्म इंडस्ट्रीज में अपना झंड़ागाड़ जिले का नाम रौशन किया। जब पुरे देश में 15 अगस्त को शान से तिरंगा लहराया जा रहा था तो प्रिया इंडियन फिल्म एण्ड टीवी डायरेक्टर्स ऐसोसिएशन (आईएफटीडीए) मुम्बई में मतदान का सामना कर रही थी। जब रिजल्ट आया तो कार्यकारिणी की सदस्य चुनी गई। प्रिया बड़का सिघनपुरा गांव निवासी रमेशचन्द्र ओझा की बेटी हैं।

जब यह खबर गांव पहुंची तो खुशी का ठिकाना न रहा। जानकारी के अनुसार 15 अगस्त को हुए आईएफटीडीए चुनाव में प्रिया अशाोक पंडित दल का नेतृत्व करते हुए इस पद के लिए नमांकन किया। जिसमें दो पक्षों में कुछ 16 उम्मीद्वार थे और 900 लोगों ने मतदान किया। जिसमें दियारांचल की बेटी को सर्वाधिक 696 बोट मिले। प्रिया अब आठ सदस्यीय कार्यकारिणी की चेयरपर्सन के तौर पर पद संभालेगी। प्रिया के आईएफटीडीए के चेयरपर्सन की सूचना पिता रमेश ने गांव वालों को दी। गांव की इस बेटी पर सभी को गर्व है।

-माता-पिता की फाइल फोटो

प्रिया का परिचय
बक्सर खबर। सिघनपुरा गांव निवासी स्वर्गीय बैद्यनाथ ओझा के पुत्र रमेश चन्द्र ओझा की पुत्री के रूप में प्रिया का जन्म में 1989 में हुआ था। चार भाई बहनों में दुसरा स्थान प्रिया का है। क्योंकि प्रिया के माता-पिता उस वक्त भागलपुर में रहते है। जहां उनकी जमीन और मकान है। प्रिया शुरू से ही पढऩे में होनहार थी। प्राथमिक पढ़ाई के बादा पिता रमेश चन्द्र ओझा व माता नीरा ओझा के साथ रांची चली गई। वहां मैट्रिक के बाद निर्मला कॉलेज से ग्रेजुएशन किया। उसी दौरा प्रिया के पिता रमेश ने बताया कि उसने ऐनीमेशन की कोर्स करने की रूची दिखाई। पुणे में वर्ष 2010-2012 नमांकन कराया गया। उसी कोर्स में फिल्म मेकिंग सब्जेक्ट था। जहां से प्रिया ने अपने आपको फिल्मी दुनिया की तरफ मोड़ लिया। प्रिया को 27 मई 2018 को झारखण्ड कि पहली इंटरनेशनल फिल्म फेस्टीवल के दौरान उभरते सितार (इमरजिंग टैलेंट) का पुरस्कार मिल चुका है। आज हमें उस पर गर्व है।
गुरूदत्त साहब की पॉकिजा ने फिल्मों में जगाई रूची : प्रिया
प्रिया ने फोन पर बातचीत में कहा कि मेरे आइकॉन गुरूदत्त साहब है। मैनें उनकी पहली फिल्म पाकिजा देखी थी। उसके बाद से उनके द्वारा निर्मित कई फिल्में मैने देखी जिससे मुझे फिल्मों की तरफ आर्कषण होने लगा। जिसके बाद धीरे-धीरे मैं फिल्म मेकिंग से जुड़ी। आज इंडस्ट्रीज के लोगों का भरपुर प्यार मिल रहा है। जिसके बदौलत मैं आईएफटीडीए के चेयरपर्सन भारी समर्थन से बनी। जिस तरह से इंडस्ट्रीज के लोगों ने भरोसा किया है उस पर खरा उतरना ही पहला लक्ष्य है। देश में ऐसोसिएशन से जुड़ी फिल्में और टीवी के सहायक निर्देशकों के बेहतरी के लिए काम करूगीं।
कुल देवता के पूजा में गई थी गांव
प्रिया ने बताया बचपन में बड़का सिघनपुरा गांव में ही रहती थी। उसके बाद पढ़ाई के लिए रांची गई। होली-दिवाली पर भी माता-पिता के साथ गांव जाती थी। उसके बाद पढ़ाई का बोझ बढ़ा तो शादी विवाह के मौके पर पहुंची थी। मैंने 2002 के बाद सीधे मार्च 2017 में कुल देवता के पूजा में मम्मी-पापा के साथ गांव जाने का मौका मिला। मेरी सोच भी है कि अपनी जिंदगी में गांवकी मिट्टी से जुड़ी खुबसुरती को सिनेमा के पटल पर लाउगी। इसके लिए काम चल रहा है। लेकिन प्रोटोकॉल के तहत अभी नहीं बता सकती हूं।
गांव में काफी टायलेंट है उसे अभिभावक दबाएं नहीं
प्रिया ने युवाओं के नाम संदेश देते हुए कहा कि हार्डवर्क करो किसी की अनाप सनाप बात न सुनों तो कोई भी लक्ष्य आप हासिल कर सकते है। इसके लिए जिस तरह से मां-बाप ने आप पर भरोसा किया है। आप उनके भरोसा को कभी टूटने न देना। गांव की गलियों में काफी टायलेंट है। उसे अभिभावक दबाए नहीं। बच्चों को जिस तरफ रूची हो उसमें खुलकर मदद करें। एक दिन वो आपका नाम रौशन करेगा।