बक्सर खबर। बिहार के कई जिलों में बर्ड फ्लू के वायरस ने दस्तक दे दी है। मुंगेर सदर प्रखंड के मुबारकचक में कौवों के बाद मुर्गियों में भी बर्ड फ्लू का वायरस पाया गया है। स्वास्थ्य विभाग को अलर्ट पर रहने के आदेश देने के साथ ही जिलाधिकारी ने कहा है कि अब शुक्रवार से पक्षियों को मारे जाने की प्रक्रिया शुरू होगी।

हालांकि बक्सर सदर अस्पताल को राज्य के स्वास्थ विभाग की ओर से इस संबंध में कोई निर्देश नहीं मिला है। ऐसे में आम लोगों को परेशान होने के बजाय खुद ही सावधान रहने की जरूरत है। राज्य पशुपालन विभाग से लोगों के मोबाइल पर बर्ड फ्लू से संबंधित मैसेज मिलने लगे हैं। यदि कहीं भी अचानक से पक्षियों को मरते हुए देंखे तो तत्काल इसकी सूचना अपने नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र को दें।
प्रदेश में अब तक 500 से अधिक पक्षियों की मौत हो चुकी है और सरकार ने एक नियंत्रण सेल भी बना दिया है, लेकिन सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि प्रदेश में ऐसा कोई भी मेडिकल कॉलेज नहीं है जहां एच5एन1 वायरस की जांच होती हो। बिहार के नौ मेडिकल कॉलेजों में से किसी में भी इसकी जांच नहीं होती है। सबसे बड़े अस्पताल राजधानी पटना के पीएमसीएच में भी ‘रीयल टाइम पीसीआर’ मशीन नहीं है। दरभंगा के डीएमसीएच में वर्ष 2013 में जांच के लिए ये मशीन लगाई गई थी, लेकिन ये कई सालों से खराब पड़ी है। कहा तो ये जा रहा है कि इसका कभी उपयोग ही नहीं किया गया। वायरस की जांच के लिए पुणे और भोपाल के लैब में सैंपल भेजे जाते हैं।
इस संबंध में जब जिला स्वास्थ्य उपाधीक्षक डॉक्टर अनिल से पूछा गया तो उन्होंने बताया कि उन्हें स्वास्थ्य विभाग की ओर से अभी बर्ड फ्लू के संबंध में कोई निर्देश नहीं मिला है। लेकिन अस्पताल में आने वाले मरीजों को सावधान रहने के लिए कहा जा रहा है। उन्होंने कहा कि लोगों को सावधान रहने की जरूरत है। चिकेन खाने वालों को कुछ वक्त के लिए इससे दूरी बना लेनी चाहिए। साथ ही पॉल्ट्री फार्म वालों को भी निगरानी बढ़ा देनी चाहिए।

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