बक्सर खबर : झारखंड के छिन्नमस्तिका मंदिर में खुद की बलि देने वाले संजय नट का शव गुरुवार को दफनाया गया। पारंपरिक रीतिरिवाज के अनुसार उसके पिता, पुत्र व भाइयों ने मिलकर अंतिम संस्कार किया। बलिहार गांव में दलित कब्रिस्तान हैं। वहीं सुबह आठ बजे यह कार्य संपन्न हुआ। गांव के लोग संजय को देखने के लिए उमड पडे। यही चर्चा हो रही थी। क्या कोई अपनी बलि दे सकता है ?

बड़े भाई ने कहा कराएंगे जांच
बक्सर खबर : संजय नट के बड़े भाई संतोष नट ने कहा, मेरे भाई की हत्या की गई है। वहां मंदिर के पास लगे सीसी टीवी में उसके परिक्रमा की तस्वीर है। ऐसा कहा गया है। आत्महत्या का फूटेज नहीं है। ऐसा क्यूं। अभी हम लोग पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं। इसके बाद पूरे मामले के उदभेदन के लिए संघर्ष होगा। अंतिम संस्कार के समय संजय के छोटे भाई कृष्णा नट, चाचा शिवनरायण नट (बीएमपी जवान), पिता हृदया नट (बीएमपी जवान), एवं गांव के सभी लोग मौजूद थे। सभी घर वाले एक स्वर में यही कह रहे थे। संजय के साथ धोखा हुआ है। कुछ लोगों ने बताया कि संजय सीआरपीएफ के बम निरोधक दस्ते का सिपाही था। वह कायर नहीं था। किसी ने उसे निशाना बनाया है।

शव को निहारते परिजन

रविवार को घर से निकला संजय गुरुवार को दफन हो गया
बक्सर खबर : संजय नट बीस दिन की छुट्टी काट रविवार को ही यहां से गया था। सोमवार को उसे रामगढ़ के छिन्नमस्तिका मंदिर के पास देखा गया। मंगलवार की सुबह उसकी मौत हो गयी। जिसे पूरे देश ने नरबलि के रुप में सूना। बुधवार की रात एक बजे परिजन शव को लेकर सिमरी थाना के बलिहार गांव पहुंचे। गुरुवार की सुबह आठ बजे मिट्टी के नीचे दफन कर दिया गया। इस तरह बहादुर जवान का अंत हो गया।

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