बक्सर खबर : जिले के अच्छे पत्रकारों में एक ऐसा नाम शामिल है। जो मुख्य धारा का हिस्सा होने के बावजूद भी भीड़ से हमेशा अलग रहता है। इनका नाम प्रमोद चौबे है। हिन्दुस्तान समाचार पत्र में लंबे समय से काम करते आ रहे प्रमोद के जीवन के भी कई रोचक पहलू हैं। प्रशासनिक अधिकारी बनने का लक्ष्य लिए वे लंबे समय तक इलाहाबाद में रहे। पीसीएस की तीन बार परीक्षा निकाली। लेकिन मेन्स से वापस हो गए। समय गुजरता रहा। किसान पिता की मजबूरियों को सोच बेटा वापस गांव लौट आया।

यहां आने के बाद परीक्षाओं का दौर जारी रहा। सफलता हाथ नहीं लगी तो मीडिया की तरफ रुख किया। वर्ष 2005-06 का दौर था। वे आज अखबार के दफ्तर पहुंचे और कलम चलाने लगे। जिले के पत्रकारों की सूची में एक और नाम जुड गया। इस रविवार बक्सर खबर ने अपने साप्ताहिक कालम इनसे मिलिए के लिएप्रमोद को चुना है। प्रस्तुत है उनसे हुई बातचीत के मुख्य अंश।
किसी का न हो नुकसान, इसका रखे ध्यान
बक्सर : प्रमोद चौबे कहते हैं। दस वर्ष का समय गुजर गया। पत्रकारिता करते हुए मैंने हमेशा अपने आप को भीड से अलग रखने का प्रयास किया। मेरी वजह से कोई दुखी न हो यही प्रयास रहा। मेरी कलम अकारण किसी को तकलीफ ने दे इसका ध्यान आज भी मैं रखता हूं। अपनी समस्या लेकर अखबार के कार्यालय तक आने वाला व्यक्ति मीडिया के बारे में अच्छी सोच लेकर लौटे। इसका ख्याल मैं रखता हूं, अन्य साथी भी ध्यान रखें।
पत्रकारिता जीवन
बक्सर : प्रमोद 2004-05 में बक्सर आए। यहां आने के बाद कुछ साथियों से बात हुई। एक दिन पहुंच गए ठठेरी बाजार। जहां अमित चन्द्रा से मुलाकात हुई। आज के दफ्तर में बबलु उपाध्याय प्रभारी थे। अमित ने हौसला बढ़ाया। बस क्या था चल पड़ी गाड़ी। लेकिन अखबार से मानदेय भी नसीब नहीं था। प्रमोद वापस अपने गांव गोसाईपुर लौट गए। एक होनहार युवक वक्त की मार सह रहा था। इसी बीच उनकी मुलाकात प्रभात खबर के विवेक सिन्हा से हुई। उसने हौसला दिया और गांव छोडऩे की सलाह दी। महज 800 रुपये में चौबे जी बक्सर आ गए। लेकिन पेट पालना मुश्किल था। एक निजी स्कूल में पढ़ाने लगे। साथ ही कुछ बच्चों को ट्यूशन पढ़ाने लगे। धीरे-धीरे जीवन की गाड़ी चल पड़ी। वर्ष 2010 में प्रभात खबर से हिन्दुस्तान में आए। इस बीच शिक्षक की नौकरी भी मिल गई। उन्हें अब किसी से कोई मलाल नहीं है।
व्यक्तिगत जीवन
बक्सर : प्रमोद कुमार चौबे का जन्म 5 जून 1975 को राजपुर प्रखंड के गोसाइपुर गांव में हुआ था। पिता श्री विन्ध्याचल चौबे के प्रथम पुत्र के रुप में उनका आगमन हुआ। अपने तीन भाइयों में वे सबसे बड़े हैं। दूसरा भाई भी शिक्षक और छोटा भाई वाराणसी में पढ़ता है। प्रमोद बताते हैं, मैंने 1991 में सिकरौल हाई स्कूल से मैट्रिक की परीक्षा पास की। दिलदारनगर से इंटर पास किया। एमवी कालेज से गणित का छात्र रहते हुए स्नातक किया। समय गुजरता रहा, शादी हो गई। प्रमोद अब एक पुत्र व पुत्री के पिता का धर्म भी निभा रहे हैं।